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ड्राइिवंग लाइसेंस रिन्यू कराने आए रिटायर्ड पुलिस अफसर को दिया 'वीआईपी ट्रीटमेंट'

7 वर्ष पहले
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लुधियाना. इसे विजिलेंस ब्यूरो का खौफ कहें या अफसर से नजदीकी बढ़ाने के लिए जी-हुजूरी की इंतहा। डीटीओ ऑफिस के सुविधा सेंटर के मुलाजिमों ने पक्के लाइसेंस को रिन्यू और एड्रेस चेंज करवाने आए रिटायर पुलिस अफसर को "वीआईपी ट्रीटमेंट' दे दिया।

अफसर के अमृतसर में विजिलेंस ब्यूरो के एसएसपी होने की भनक लगी तो डीटीओ के अंडर काम कर रही ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली स्मार्ट चिप कंपनी के मुलाजिमों ने खुद ही पुलिस अफसर की आवेदन की फाइल तैयार की और फिर टाइम खत्म होने के बाद उनकी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फोटो तक करवा दी। जिन मुलाजिमों को अफसर के आने पता नहीं था, उनमें तो गनमैन और विजिलेंस अफसर काे देख हड़कंप मच गया।
फोन पर "साहब', लाइसेंस पर एसएसपी
पहले गनमैन ने सुविधा सेंटर के मुलाजिम को फोन कर बताया कि "साहब' का ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करवा एड्रेस फिरोजपुर से बदलकर लुधियाना का करना है। गनमैन पहुंचा तो साथ में प्रूफ के अलावा पुलिस अफसर का लाइसेंस लाया। इसमें पुलिस अफसर को एसएसपी विजिलेंस अमृतसर लिखा था। यह देखा तो मुलाजिमों ने चुपचाप सारी फाइल बना दी।
टाइम खत्म, फिर भी फोटो
ड्राइविंग लाइसेंस देख मुलाजिम ऐसे इंर्पेस हुए कि आगे कुछ नहीं पूछा। आम लोगों के लिए लाइसेंस की फीस भरने का समय एक बजे और फोटो का टाइम डेढ़ बजे तक है लेकिन अफसर को खुश करने के लिए मंगलवार शाम चार बजे फोटो करवाई। जबकि, उस समय पब्लिक डीलिंग खत्म हो जाती है।
ऑपरेटर किनारे, एजेंट्स दौड़े
वर्दी पहने गनमैन के साथ जैसे ही अफसर सेंटर में आए तो हड़कंप मच गया। कुछ दिन पहले चीफ सेक्रेटरी सर्वेश कौशल की चेकिंग में एजेंटों की मिलीभगत से डीएल बनाने की विजिलेंस इंक्वायरी हो रही है, इसलिए अफसर के आते ही सब काम छोड़ किनारे हो गए और एजेंट्स भी उल्टे पांव बाहर दौड़ गए।
अफसर को किया ऑब्लाइज
अब वो अफसर हैं, इसलिए ऑब्लाइज किया। यह सब करना ही पड़ता है। मुझे डीटीओ का भी फोन आया था। इसलिए टाइम खत्म होने के बाद भी फोटो करवा दी।
-राजेश, स्मार्ट चिप कंपनी
मुझे नहीं पता, पूछता हूं
कौन अफसर था, किसकी परमिशन से फोटो हुई, मुझे नहीं पता। मैं तो इलेक्शन ट्रेनिंग में बिजी था। पता करता हूं, यह सब कैसे हुआ।
-अनिल गर्ग,डीटीओ