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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. पंजाब में गेहूं की खरीद में तीस लाख मीट्रिक टन की गिरावट ने कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। 140 लाख टन खरीद करने के दावे की पोल खुल गई है, क्योंकि अभी तक मंडियों में 106 लाख टन गेहूं ही पहुंच पाया है। मंडियों में आवक मात्र 70 हजार टन रहने से अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि तीन से चार लाख टन गेहूं ही और आ पाएगा। यदि 110 लाख टन गेहूं की खरीद रह जाती है तो इसका सीधा अर्थ है कि किसानों को 4725 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
प्राइवेट खरीद बढ़ी:खरीद में कमी को देखते हुए प्राइवेट कंपनियों ने मंडियों में गेहूं की खरीदारी शुरू कर दी है। पिछले साल मात्र 1923 मीट्रिक टन प्राइवेट कंपनियों ने खरीदा था, जबकि इस साल अभी तक 1.20 लाख टन गेहूं कंपनियां खरीद चुकी हैं। इससे आटा महंगा होने के आसार हैं।
खेती विभाग की दलील
खेती विभाग यह कहकर बात को टाल रहा है कि पैदावार की तुलना पिछले साल के मुकाबले नहीं की जा सकती बल्कि पिछले पांच साल का आंकड़ा जब पास होगा तो ही बताया जा सकेगा कि पैदावार कितनी गिरी? विभाग के डायरेक्टर मंगल सिंह ने बताया कि पंजाब में 8 से 10 फीसदी पैदावार गिरी है। उन्होंने पैदावार गिरने का कारण ये बताया है कि जब गेहूं को दाना पड़ रहा था तब हुई बारिश ने फसल का नुकसान किया। पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. जीएस कालकट का भी कहना है कि अचानक हुई बारिश की वजह से दाने पूरे नहीं बन सके।
किसान से किसी को हमदर्दी नहीं : राजेवाल
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने दावा किया है कि किसानों को इस साल गेहूं की पैदावार से 7486 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि 30 लाख टन पैदावार कम होने से जहां उन्हें 4750 करोड़ का नुकसान हुआ है वहीं हरियाणा सरकार ने गेहूं की उत्पादन लागत 1613 रुपए निकाली थी जबकि किसानों को एमएसपी 1350 रुपए प्रति क्ंिवटल दी गई है, इससे उन्हें 2761 करोड़ का नुकसान हुआ है। राजेवाल ने कहा कि एक बार 200 रुपए किसानों को और देने की मांग करके दोनों राजनीतिक पार्टियों ने चुप्पी साध ली है। किसी को भी किसानों की चिंता नहीं है जो लगातार कर्ज के बोझ से दबता जा रहा है।
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