नीरज के सरेंडर से लेनदारों की बढ़ी मुश्किलें, अब लड़ना होगा केस
लोगोंको प्लाट और अन्य संपत्तियां बिक्री करने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगिया मारने के मामले में नामजद नेचर-हाइट्स इंफ्रा के मालिक नीरज अरोड़ा ने सरेंडर कर शिकायतकर्ताओं से बचने के लिए खुद का बचाव किया है।
कानून विशेषज्ञों की मानें तो अरोड़ा ने सरेंडर इसलिए किया है ताकि लोगों का पैसा एक बार वापस किया जाए और सारे मामलों को अदालत में पहुंचा दिया जाए। अदालती कार्रवाई में काफी समय भी लगेगा और उन्हें लोगों के विरोध का सामना भी नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि अरोड़ा के करोड़ों रुपयों के कर्ज का बोझ है और उसे चुकाने के लिए उसे कई पैंतरे आजमाने पड़ेंगे। हालांकि अरोड़ा इससे पहले सेटलिंग के प्रयास कर चुका है लेकिन उस सेटलिंग से लोग सहमत नहीं हो रहे थे क्योंकि वो लोगों के एक रुपए को मात्र 20 पैसे के हिसाब से लोगों को कोई कोई संपत्ति देकर वापस कर रहा था। ऐसे में लेनदार सहमत नहीं हुए तो उन्होंने स्थानीय विधायक सुनील जाखड़ की मदद लेकर चंडीगढ़ में एक प्रैस कॉन्फ्रेंस की और डीजीपी से मुलाकात की थी। उस दिन से कार्रवाई तेज की गई तो अरोड़ा की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई। हर तरफ के रास्ते पर भटकने के बाद आखिर में उसने सरेंडर तो कर दिया लेकिन यह भी उसकी सोची समझी साजिश का हिस्सा ही नजर रहा है। क्योंकि जिन लोगों का करोड़ों रुपया अरोड़ा के पास जमा पड़ा हुआ है उन्हें पैसों से मतलब है कि नीरज अरोड़ा की गिरफ्तारी से, लेनदार तो पहले से पैसा मिलने के कारण परेशान हैं और अब अरोड़ा ने सरेंडर कर दिया तो उनकी परेशानी और भी बढ़ गई है। क्योंकि गिरफ्तार होने के बाद प्रत्येक लेनदार को अदालत में केस लड़ना होगा जिनके फैसले तब होंगे जब लोगों का मूल धन मार्केट के अनुसार कई गुणा हो जाएगा लेकिन तब भी अरोड़ा पैसा लौटाएगा या नहीं इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
पता चला है कि नीरज अरोड़ा ने इस समय लोगों का इतना धन देना है जिसकी अदायगी की जानी काफी मुश्किल है, क्योंकि अरोड़ा द्वारा लोगों को ऐसे अंजान स्थानों पर प्रॉपर्टीज बेची गई हैं जिनके बारे में कभी किसी ने सुना भी नहीं। उन संपत्तियों के लिए नीरज ने भी आगे भुगतान किया हुआ है और वो ऐसी संपत्तियां हैं जिनके मालिकों ने कभी बिक जाने के बारे में सोचा भी नहीं था।
हिस्सा निकाल गया था अरोड़ा का पार्टनर
नीरजअरोड़ा के साथ पहले दिन से साथ देने वाले उसके मुख्य पार्टनर प्रमोद नागपाल ने काफी समय पहले हिस्सा निकाल लिया था, क्योंकि वो उसके कार्य से अच्छी तरह से परिचित हो चुका था। नागपाल को समझ गई थी कि नीरज अरोड़ा एक ऐसी महाभारत तैयार कर रहा है जिसका अंत काफी बुरा होगा। विशेष बात तो यह भी है कि जिस समय प्रमोद नागपाल ने अपनी हिस्सेदारी निकाली उस समय कंपनी काफी मुनाफे में थी। भारी मुनाफा होने के बावजूद हिस्सेदारी निकालना अरोड़ा की सोच की तरफ इशारा कर रहा था लेकिन नागपाल ने इसके बारे में इसलिए चर्चा नहीं की क्योंकि उन्होंने भी नीरज के साथ मिलकर प्रचुर मात्रा में धन अर्जित किया था। ऐसे में नीरज की विरोध की जगह हिस्सेदारी निकालना एक उचित विकल्प था।
नीरज अरोड़ा