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कौंसिल चुनाव: वोट बनाने में जुटे कैंडीडेट

7 वर्ष पहले
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नाभा। नगरकौंसिल चुनाव होने में सिर्फ दो महीने बचे हैं, लेकिन हलके में चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। विभिन्न पार्टी के कैंडीडेटस् ने अपने अपने वाॅर्ड में मीटिंग और लोगों से संपर्क बनाना अभी से शुरू कर दिया है। नाभा हलका रिजर्व हो चुका है। कई वाॅर्ड रिजर्व होने के कारण और कुछ वॅार्डों में फेरबदल होने के कारण कैंडीडेट्स को अपनी बनी बनाई सियासत छोड़ कर दूसरे वॉडों मे जाना पड़ रहा है। नाभा रिजर्व होने के कारण भले ही हलका अकाली दल के हलका इंचार्ज मक्खन सिंह लालका के हाथ में कमांड है लेकिन स्व. राजा नरिंदर सिंह ग्रुप की उनसे दूरियों के कारण कौंसल चुनाव में बगावत की संभावना है। वहीं कांग्रेस में भी गुटबाजी साफ दिख रही। बेशक नाभा के कांग्रेसी एमएलए साधु सिंह धर्मसोत की एक अपनी पहचान है लेकिन यहां से दो बार एमएलए रहे चुके मौजूदा अमलोह के एमएलए काका रणदीप सिंह का भी जनाधार है। कई एमसी काका रणदीप के इशारे पर चुनाव लड़ सकते हैं। साबका एमएलए रमेश कुमार सिंगला भी इलेक्शन में अहम रोल अदा कर सकते हैं।

यह है नगर कौंसिल नाभा का इतिहास

1949में नगर कौंसिल नाभा बनने के बाद अकाली भाजपा सरकार केवल 3 से 4 बार जीत हासिल कर सकी। यहां कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। यहां की कुर्सी सबसे पहले एडवोकेट बाबू रमेश गोयल ने संभाली थी। इसके बाद भरत लाल, राजा नरिंदर सिंह, हरि कृष्ण सेठ, आशा सिंह साहनी, चरण दास गुप्ता, साबका एमएलए रमेश कुमार सिंगला, स्वरूप सिंगला, प्रेम कुमार गागट, राजेश बबला, नरिंदर भाटिया, गौतम बातिश, पवन गर्ग, हरसिमरत साहनी और गुरबख्शीश सिंह भट्टी प्रधान रह चुके हैं। नाभा में 7 वाॅर्ड हुआ करते थे लेकिन मौजूदा समय मे 23 वाॅर्ड बन चुके हैं। 2003 के चुनाव में शहर में 21 वाॅर्ड थे।