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पुस्तक में िसख पंथ को व्यावहारिक ज्ञान देने का यत्न: हरसिमरन िसंह

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | आनंदपुरसािहब

अकालतख्त सािहब के पंथक सरोकार सिख पंथ की नई तकदीर बनाने वाली एक दस्तावेज़ है। जो िसख पंथ, इसके नेताओं और संस्थायों के लिए भविष्य की दिशा और दशा को नई बुलंदियों तक ले जाएगी। यह बात भाई हरसिमरन सिंह प्रमुख भाई गुरदास इंस्टीट्यूट आॅफ एडवांस सिख स्टडीज़ आनंदपुर साहिब ने अपनी नई प्रकाशित पुस्तक \\\"अकाल तख्त साहिब के पंथक सरोकार\\\' के बारे में कही। उन्होंने बताया कि 300 साल के िसख इतिहास में गुरु ग्रंथ साहिब की व्याख्या, सिख सिद्धांतों और इतिहास बारे तो अनेकों पुस्तकें लिखीं जा चुकीं हैं, परन्तु \\\"गुरु ग्रंथ और गुरु पंथ\\\' के सिद्धांत की सिरमौर केंद्रीय संस्था अकाल तख़्त साहिब बारे उनकी पहली अकाल तख़्त साहिब की ग्लोबल दृष्टि और यह पुस्तक अपने आप में पहले और अलग य| हैं। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक सिख पंथ को व्यावहारिक ज्ञान देने वाला एक य| है। जत्थेदार अकाल तख़्त साहिब को यह केंद्रीय नेता शख्सियत मान कर जहां उनके संभावी गुणों का एक उच्च स्तर नियत किया गया है, वहीं पंथक राजनीति और सत्ता व्यवस्था समेत सिख संस्थायों की लीडरशिप के जरुरी स्तर और कार्यशैली भी निश्चित गए हैं। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में सिख पंथ की नई जरूरतो के अनुसार गुरुद्वारा संस्था में लाए जाने वाले सुधारों की रूपरेखा बनाने के साथ साथ उन्होंने पंथक सरोकारों की भी सीमा रेखा की गई है जिन अनुसार जत्थेदार अकाल तख़्त सािहब अन्य सिंह साहिबान, सिख लीडरशिप समेत सिख संस्थायों ने पंथ के भविष्य का एजेंडा नियत करना है। उन्होंने जानकारी दी कि अपनी, पिछली किताबें को अकाल तख़्त सािहब को भेंट करने की निरंतरता में वह इस पुस्तक को भी जत्थेदार साहिबान की तरफ से बुलाई जाने वाली आगे वाली मीटिंग वाले दिन अकाल तख़्त साहिब में भेंट करेंगे तथा सिंह साहिबान को यह पुस्तक पंथ अर्पण करने के लिए संगत की तरफ से अपील की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि छह साल की मेहनत के साथ रची गई इस पुस्तक में दिए विचारों को पैंफ्लिट रूप में छाप कर और सिख संगतों में बांट कर नई चेतना लहर शुरू की जाएगी।