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चुनाव के राजनीितक दलों के लिए मायने

6 वर्ष पहले
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भाजपा-अकाली दल केलिए लोकल बॉडीज चुनाव काफी अहमियत वाले हैं। इसका मुख्य कारण पंजाब में अकाली भाजपा सरकार है तो दिल्ली में भाजपा की सरकार। इसलिए इन चुनावों में अकाली भाजपा के लिए अपनी साख बचाने के लिए इन चुनावों को जीतना और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। क्योंकि विधानसभा चुनावों के दौरान बरनाला सिटी से शिअद को हार का सामना करना पड़ा था। अब दोबारा जहां से चुनाव जीत कर शिअद-भाजपा अपनी खास को बचाना चाहेगी।

ताकत-अकाली-भाजपाकी ताकत एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना है। केंद्र राज्य सरकार में अपनी सरकार होने का वादा भी इन चुनावों में अकाली-भाजपा को मिलेगा। वहीं देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और राज्य सरकार द्वारा करवाए गए विकास कार्यों का भी फायदा मिलेगा और चुनाव जीतने के बाद संगरूर का और ज्यादा विकास हो सकता हैं। इन चुनावों को भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों की चाबी की तरह देख रही है अगर चुनाव जीतते हैं तो एमएलए की सीट की तैयारी बढ़िया होगी। इसके अलावा आरएसएस की सरगर्मी का फायदा भी गठबंधन को मिलेगा।

कमजोरी-सरकारविरोधी लहर अकाली-बीजेपी को परेशानी में डाल सकती है। अकाली-भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी इन चुनावों में उम्मीदवारों के चयन की होगी। क्योंकि इन चुनावों में भाजपा के पास एक वार्ड से दो-दो, तीन-तीन उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं और टिकट एक उम्मीदवार को ही मिलेगी। इसके बाद दूसरे उम्मीदवारों के बागी होने का परिणाम पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

अंतर्कलह-भाजपाकी गुटबाजी जगजाहिर है। गुटबाजी के कारण तीक्ष्ण गुट द्वारा खन्ना गुट के उम्मीवादवारों के वार्डों की सीटों को लेडीज वार्ड करवाया गया है, जिसका फायदा विरोधियों को मिलेगा। वहीं कई वार्डों में टिकटों के आवेदन को लेकर भी दोनों गुटों के उम्मीदवार अपनी अपनी राजनीतिक पावर दिखाएंगे अगर एक गुट को टिकट मिलता है तो दूसरा गुट अपने उम्मीदवार को आजाद भी खड़ा कर सकता हैं।

कांग्रेसपार्टी केलिए लोकल बॉडी चुनाव खास अहमियत रखते हैं। पहले राज्य में अकाली-भाजपा से पटखनी तथा बाद में केंद्र में हुए चुनावों में कांग्रेस के क्लीन स्वीप होने के कारण पार्टी की इमेज को दोबारा से तैयार करने के लिए ग्राऊंड लैवल पर बहुत वर्क करना पड़ेगा। इन चुनावों से ही कांग्रेस पंजाब में वापसी का रास्ता ढूंढ रही है। विधायक की सीट को दोबारा जीतने के लिए भी ये चुनाव होमवर्क से कम नहीं हैं

ताकतऔर कमजोरी- कांग्रेसकी पूरे देश में छवि खराब हुई पड़ी है जिसके कारण इन चुनावों में जीतना अहम चुनौती होगी। सरकार विरोधी लहर का चलना, प्रॉपर्टी टैक्स, रेत बजरी और नशों के बढ़ावे से अकाल-भाजपा की छवि खराब हुई है जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस के पास विशेष छवि का नेता नहीं होना भी एक बड़ी समस्या हैं। चुनावों में वार्डो में टिकटों को लेकर काफी चुनौती सामने आएंगी।

आमआदमी पार्टी केलिए ये चुनाव बहुत अहम हैं। इसका मुख्य कारण दिल्ली में पहले हुए चुनावों में आप की स्थिति बढ़िया थी। इसके बाद पंजाब में आम चुनाव में भी पार्टी ने पूरे देश में पंजाब से ही सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया था। इसलिए आम आदमी पार्टी पहली बार लोकल बॉडी चुनाव में किसी बड़े धमाके के इंतजार में है। पार्टी की ताकत पिछले चुनावों में पंजाब में किया बढ़िया प्रदर्शन है। आप के लिए सबसे बढ़िया समस्या इमानदार उम्मीदवारों को ढूंढने की है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी में भी गुटबंदी के कारण नुकसान हो सकता हैं।

धनौला की जनसंख्या 34 हजार के करीब है जिनमें 15 हजार के करीब वोटर हैं। पिछले चुनावों में धनौला से बीबी बलजीत कौर मान वार्ड नंबर-4 से चुनाव लड़ी और जीतकर नगर काउंसिल की प्रधान बनी। इसके मुकाबले कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ा था। इस बार भी बीबी बलजीत कौर मान चुनाव लड़ने जा रही है।

नगर काउंसिल तपा के पूर्व प्रधान त्रिलोचन बांसल पिछले चुनावों में वार्ड नंबर- 8 से शामलाल गौड को पराजित किया था। तपा की जनसंख्या 30 हजार के करीब है। इनमें 16 हजार 746 वोटर हैं। जिनमें 7826 पुरुष वोटर और 6920 महिला वोटर हैं। तपा में नगर कौंसिल अभी तक बस स्टैंड का निर्माण नहीं करवा सकी है।

काउंसिल के पूर्व प्रधान जसवीर सिंह धम्मी पिछली बार वार्ड नंबर-2 से चुनाव जीते थे और उन्होंने कांग्रेसी प्रत्याशी निर्भय सिंह ढींढसा को पराजित प्रधान बने। उनसे पहले कांग्रेस के नाहर सिंह नेहरू प्रधान थे।