नाटकों ने लोगों के मन पर छोड़ी छाप
बरनाला|पंजाबी रंगमंचके बाबा बोहड़ नाटककार गुरशरण सिंह की याद में कामागाटामारू की 100वीं वर्षगांठ, शहीद भक्त सिंह के 105 जन्म दिन को समर्पित अनाज मंडी में करवाए गए समागम में खेले गए नाटकों ने लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। इस समागम में लोक लहर से जुड़ी सभी मजदूर, किसान, कर्मचारी, विद्यार्थी सभ्याचार के संगठनों के हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। समागम की शुरुआत में गुरशरण सिंह शहीद भक्त सिंह की तस्वीरों को गुरशरण सिंह की धर्मप|ी कैलाश कौर, बेटिया डॉ नवशरण, डॉ अरीत, डॉ अतुल, अमलोक सिंह, कंवलजीत खन्ना, प्रो अजमेर सिंह औलख, ओम प्रकाश गासो आदि ने फूल अर्पण किए। इस मौके पर युवा थियेटर जालंधर के अकुंर शर्मा की तरफ से नाटक जिथे कविता खत्म हुदी है, सुचेतक रंग मंच मुहाली की अनिता सबनीश की तरफ से एक मिट्टी के पुत, पीपलज थियेटर सैमुअल जौन की तरफ से जाओ देवोे होका, लोक रंग मंच के चंन चमकौर निर्मल धालीवाल की तरफ से गाथा-ए-गदर, अमलोक सिंह का एक रात दो सुरज जैसे नाटक खेले गए। इंकलाबी गीत-संगीत से मास्टर राम कुमार भदौड़, सर्वण रसुलपुरी, जगसीर जिंदा, ईकबाल उदासी अमृतपाल बठिंडा ने सब का मन मोहा।