नए नियम के खिलाफ कीटनाशक दवा विक्रेता सड़कों पर उतरे
केंद्रसरकार द्वारा कीटनाशक दवा विक्रेताओं के लिए बनाया गया नया नियम उनके गले नहीं उतर रहा है। मंगलवार को जिले भर के करीब एक हजार कीटनाशक दवा और फर्टीलाइजर विक्रेता अपने कारोबार बंद करके सड़कों पर उतर आए। शहर में फर्टीलाइजर पेस्टीसाइड यूनियन के बैनर तले जुटे सदस्यों ने रोष मार्च कर डीसी कार्यालय के समक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन सदस्यों ने मांग उठाई कि डीलरों पर लागू की गई बीएससी एग्रीकल्चर डिग्री की शर्त को वापस लिया जाए। यूनियन ने चेतावनी दी कि जब तक नया नियम वापस नहीं लिया जाएगा तब तक संघर्ष जारी रहेगी।
यूनियन नेता सुखविंदर सिंह, मुकेश कुमार बांसल, अवतार सिंह ने वेद गोयल, मंगत राय ने कहा कि सरकार कुछ बीएससी डिग्री होल्डरों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए हजारों परिवारों को उजाड़ने पर तुली है।
बरनाला मंगलवार को पेस्टीसाइड दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद कर शहर में प्रदर्शन किया और डीसी दफ्तर के सामने धरना लगाकर नारेबाजी कर ज्ञापन सौंपा। धरने को संबोधित करते हुए प्रधान गोकल प्रकाश गुप्ता और भोला अरोड़ा ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पेस्टीसाइड विक्रेताओं के लाइसेंस रिव्यू कराने संबंधी जो बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री लाजिमी होने की मंजूरी दी है इससे समूह विक्रेताओं, डीलरों में रोष है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार व्यापारियों को बेघर करने पर तुली है। सरकार की इस धक्केशाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरने में बरनाला के अलावा तपा, भदौड़, महलकलां, धनौला, शैहणा से भी डीलरों ने भाग लिया। इस मौके पर राजेश बांसल, जीवन धनौला, काला राम तपा, बलजीत सिंह भदौड, टिकन लाल, धीरज ग्रोवर, बलजीत सिंह, प्रदीप कुमार, भोला अरोडा, जगन्नाथ गोयल और रेवती कांसल आदि डीलर मौजूद थे।
यूनियन का दावा : एक हजार दुकानें रहीं बंद
यूनियनने दावा किया है कि जिले भर में करीब 1 हजार डीलरों ने अपने कारोबार पूर्ण रूप से बंद रखे हैं। मंगलवार को किसी किसान को दवा, खाद और बीज आदि मुहैया नहीं करवाए गए हैं।
बरनाला में ज्ञापन सौंपते हुए पेस्टीसाइड डीलर।
रोष मार्च के दौरान नारेबाजी करते कीटनाशक दवा विक्रेता।