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शिक्षा वही जो मानव को विनयशीलता प्रदान करती हो : शचि भारती
आरडीखोसला डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को साध्वी शचि भारती ने मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान साध्वी शचि भारती जी ने बताया कि भगवान कण-कण में विद्यमान हैं।
उन्होंने बताया कि वास्ताव में शिक्षा केंद्रों में प्रदान की जा रही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य यही है कि वह अनपढ़ मानव पुतलों में मानवता के प्राणों का सुचार हो सके। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में बताया गया है कि शिक्षा वही जो मानव को विनयशीलता प्रदान करती हो। उन्होंने बताया कि रविन्द्र नाथ टैगोर कहा करते थे कि हमारा शिक्षित वर्ग सुसंस्कृत वर्ग हो कर केवल मात्र उपाधि धारी उम्मीदवारों का वर्ग बन कर रह गया है। अधिकांश बच्चें स्कूलों कालेजों में केवल अच्छी डिग्री लेने के लिए ही दाखिल होते हैं चाहे उसे प्राप्त करने के वह गलत साधन भी इस्तेमाल करने मे गुरेज नहीं करते। उन्होंने आज की शिक्षा प्रणाली को अपूर्ण करार देते हुए कहा कि वह अपना दायित्व पूरा नहीं कर पा रही। नैतिक शिक्षा का विषय पढ़ाया तो जा रहा है मगर उसका प्रभाव दिखाई नहीं देता। उन्होनें आह्वान किया कि शिक्षा में बच्चों की प्रज्ञा में सनातन संस्कार डालने के लिए हमें वैदिक काल की दीक्षा पद्धति को अपनाना होगा। आत्मिक विकास के बिना आधुनिक शिक्षा प्रणाली दीक्षा के बिना अधूरी है। इस मौके पर जगदीश राज साहनी, कस्तूरी लाल सेठ, हरिकृष्ण त्रेहण, राजेन्द्र कुमार नीटा, नवीन मेहता, जतिन्द्र महाजन, हरबंस महाजन, अरूण अग्रवाल, राजेन्द्र त्रेहण, केके शर्मा, कूष्ण बमोहत्रा, रवि, विजय, श्री अच्चलेश्वर कारसेवा ट्रस्ट, बजरंग भवन, श्रीराम तलाई मंदिर ट्रस्ट, श्री ब्राह्मण सभा, श्री शनि देव मंदिर ट्रस्ट शीतला माता मंदिर समाध रोड कमेटियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
श्रीराम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। भास्कर
साध्वी शचि भारती प्रवचन करते हुए।