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सीवरेज, सड़कों और पार्कों की दशा सुधारने का हो प्रयास

6 वर्ष पहले
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नगरपरिषद चुनाव की चर्चा अब प्रत्येक गली मोहल्ले में होने लगी है। खासकर पार्कों में इसका जोर है। धर्मपुरा कॉलोनी में हजीरा पार्क में लॉयन क्लब प्रिंस के पूर्व प्रधान हरवंत महाजन बोले कि शहर में बहुत कुछ होना बाकि है। अब मौका जनता के हाथ में है। लोग उसे चुने जो इलाके में विकास करा सकता है। वैसे शहर में सीवरेज की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। जो भी प्रधान बने उसे इस तरफ खास ध्यान देना चाहिए।

केशो गुप्ता कारोबारी ने कहा कि सीवरेज तो आए दिन रुका रहता है। पूरा का पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत है। वह उसे वोट देंगे जो जनता के काम को जल्द करवाए। वैसे तो चुनाव निकलने के बाद सभी नेता गायब हो जाते हैं। सभी वादे कर चले जाते हैं। ज्वैलर वरिंदर ने बताया कि शहर में स्ट्रीट लाइटों का बुरा हाल है। कई गलियों में तो लाइटें जलती भी नहीं है और कुछ जगहों पर दिन में भी जलती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समझना चाहिए कि जीतने के बाद भी वह लोगों के बीच जाएं और उनकी राय जानें, लेकिन एेसा नहीं हो पाता। पेशे से वकील सुरेश बांसल ने कहा कि पार्षद चाहे कोई बने। लोगों के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए नेता अगर मिलकर काम करें तो शहर को संवारा जा सकता है।

धर्मपुरा कॉलोनी के हजीरा पार्क में सैर करते हुए लोग।

फिश पार्क में चुनाव को लेकर आपस में बात करते धर्म सिंह, सुलक्खन सिंह, दर्शन सिंह, सोमनाथ शर्मा और पुरुषोत्तम लाल।

गुरदासपुर |नगरकौंसिल चुनाव को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर गर्मा चुका है। खासकर शहर के पार्कों में सैर पर आने वाले लोगों की जुबान पर आजकल चुनाव को लेकर ही मुद्दे छाए हुए हैं। फिश पार्क में सैर करने पहुंचे बुजुर्गों की आपसी बात चली तो रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर धर्म सिंह बोले कि शहर की गलियों-नालियों का बुरा हाल है। सबसे पहले इनकी दशा सुधारी जानी चाहिए। सीवरेज का भी बुरा हाल है, इस बार के चुनाव में उसी को वोट देंगे जो इनमें सुधार कर सके।

रिटायर्ड एसडीओ सुलक्खन सिंह तपाक से बोले शहर में सैर के लिए फिश पार्क ही बचा है, लेकिन उसका भी बुरा हाल है। चुनाव के समय घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी कर दी जाती हैं, लेकिन बाद में सब कुछ भूल जाता है। जनप्रतिनिधियों को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। इसी बीच रिटायर्ड फ्लाइंग अफसर दर्शन सिंह भी बोल पड़े कि शहर में सड़कों का बुरा हाल है। सड़कों में गहरे गड्ढे हैं, जिनके सुधार का लंबे समय से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा।

सरकार ऐसा कानून पास करे कि जीतने के बाद इलाके का विकास कराने वाले एमसी को हटाकर नए का चुनाव कराया जा सके। पब्लिक हेल्थ से रिटायर्ड सोमनाथ शर्मा बोले कि एमसी उसे चुनना चाहिए, जिसमें सेवाभावना हो। चुनाव जीतने के बाद दिखाई देने वाले का तो बायकॉट कर देना चाहिए।

डीसी ऑफिस से रिटायर पुरषोत्तम लाल बोले कि कौंसिल चुनाव में पार्टीबाजी का कोई महत्व नहीं होना चाहिए। ऐसे एमसी को चुनना चाहिए जो लोगों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान निकाल सकें।

चुनाव का माहौल है। ऐसे में जहां दो लोग इकट्‌ठा होते हैं राजनीति की बातें शुरू हो जाती हैं। हर कोई एक-दूसरे का व्यू जानना चाहता है। ये चर्चा सरकार की गतिविधियों, बटाला और गुरदासपुर की नगर कौंसिल की कारगुजारी, अपनी वार्ड के पार्षद की कार्यप्रणाली और शहर की हालत के लिए जिम्मेदारी को लेकर होती है। सोमवार को दैनिक भास्कर ने गुरदासपुर के फिश पार्क और बटाला के हजीरा पार्क का दौरा कर सैर करने आए लोगों में चल रही चर्चा को कवर किया। जानें क्या कहते हैं लोग उनकी वार्ड का पार्षद कैसै हो, साथ ही कौंसिल का प्रधान जिम्मेदार हो।