चीन की हरकतों पर अनदेखी आत्मघाती
जगन्नाथपुरीगोवर्धनपीठके शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने वीरवार को बटाला में दैनिक प्रार्थना सभा में पत्रकार वार्ता में कहा कि चीन से दोस्ती का हाथ मिलाते समय उसकी दुस्साहसी हरकतों को नजरअंदाज करना देश के लिए खतरनाक हो सकता है। दोस्ती बढ़ाते समय सावधानी रखना बेहद जरूरी है। देश की राजनीतिक, धार्मिक सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति का जितना नुकसान आजादी से पहले नहीं हुआ, उससे कई गुणा ज्यादा नुकसान अब हो रहा है। अंग्रेजों ने जो फूट डालो राज करो की नीति बनाई थी, उसे देश के तथाकथित ठेकेदारों ने और ज्यादा घातक बनाते हुए लोगों को जातियों में बांट कर रख दिया है।
हिंदुत्व के बारे में किए सवाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि देश के संविधान में हिंदू गैर हिंदू को परिभाषित किया गया है। ऐसे में जो लोग हिंदू होते हुए भी खुद को हिंदुओं से अलग बताने की कोशिश कर रहे, उन्हें समझना होगा कि उन सभी के पूर्वज हिंदू सनातनी ही थे। विकास के नाम पर महानगरों के हो रहे निर्माण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा महानगरों के विकास में पर्यावरण असंतुलन होने लगा है। महानगरों के विस्तार के लिए जंगलों और कृषि योग्य जमीन की बलि दी जा रही है।
उन्होंने कहा ऐसा ही होता रहा तो आने वाले समय में अनाज पानी कमी से जूझना तो पड़ेगा ही पर्यावरण असंतुलन की विकट स्थिति पैदा हो जाएगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे समय रहते ऐसी कोशिश में जुटे जिससे देश ओर समाज का कल्याण हो। इस दौरान जेएन शर्मा, तिलकराज कपूर, बाबूराम शर्मा, रमेश त्रेहण, वरिंद्र शर्मा, रमेश वर्मा, शक्ति महाजन सहित अन्य लोग मौजूद थे।
शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी बटाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए।