कौंसिल चुनाव: शिअद-भाजपा में घमासान
बटाला में भी फूट जगजाहिर
नगरकौंसिल चुनाव को लेकर शहर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। इसके तहत राजनीतिक दलों ने जहां सरगर्मियां बढ़ा दी हैं, वहीं आपसी खींचतान भी सामने आने लगी है।
सबसे ज्यादा घमासान शिअद-भाजपा में मचा हुआ है। चुनाव के पास आते ही दोनों दलों में दूरियां जगजाहिर होती दिखाई दे रही हैं। विधायक गुरबचन सिंह बब्बेहाली ने 27 में से 14 वार्डों में शिअद प्रत्याशी खड़े करने की घोषणा कर भाजपा के लिए परेशानियां बढ़ा दी हैं, अगर शिअद की ओर से 14 प्रत्याशी मैदान में उतारे जाते हैं तो भाजपा के पास 13 वार्ड ही बचेंगे। ऐसे में भाजपा नगर कौंसिल में अपना प्रधान बनाने का सपना पूरा नहीं कर पाएगी। पूर्व के चुनावों पर नजर डालें तो पहले 21 वार्डों में शिअद 5 पर ही अपना दावा जताती रही है, जबकि बाकी वार्डों में भाजपा अपने प्रत्याशी खड़े करती रही है।
इसी समिकरण के साथ दो बार भाजपा अपनी कौंसिल प्रधान बनाने में सफल हो चुकी है। ऐसे में अगर इस बार शिअद 14 वार्डों से अपने प्रत्याशी खड़े करती है तो भाजपा के लिए अपना प्रधान बना पाना कठिन हो जाएगा। इस बार शहर की राजनीति में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। विधायक बब्बेहाली का दावा है कि वे 14 वार्डों में ही अपने प्रत्याशी खड़े करेंगे। हालांकि कौंसिल प्रधान को लेकर उनका कहना है कि इसका फैसला पार्टी आलाकमान करेगी। खैर, उनके दावे के बाद दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ने की संभावना पैदा हो गई है। कौंसिल चुनाव को लेकर इच्छुक उम्मीदवारों के दावे ले रहे भाजपा उप-प्रधान अशोक वैद्य का कहना है कि बब्बेहाली समझौते के विपरीत जाकर 14 वार्डों में प्रत्याशी खड़े करने का दावा कर रहे हैं, जबकि यह फैसला पार्टी आलाकमान ने लेना है।
कांग्रेसकी चाल धीमी
उधर,वार्डों से उम्मीदवारों के दावे प्राप्त करने में कांग्रेस काफी पीछे चल रही है। खास बात यह है कि कांग्रेसियों ने अभी अपनी कोई खास गतिविधियां तेज नहीं की हैं। भाजपा की ओर से जहां करीब 56 उम्मीदवार टिकट के लिए आवेदन कर चुके हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से अभी 10 लोग ही इसके लिए पहुंचे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कौंसिल चुनाव को लेकर कांग्रेस की गतिविधियां तेज नहीं हो पाई हैं।
आम आदमी पार्टी भी अभी यह तय नहीं कर पाई है कि उसे चुनाव लडऩा है या नहीं। पार्टी के वर्कर अभी कौंसिल चुनाव को लेकर सक्रिय नहीं हुए हैं।
भाजपा के एक वार्ड से टिकट के कई दावेदार
नगरकौंसिल चुनाव को लेकर भाजपा की सरगर्मियां सबसे तेज चल रही हैं। कुछ वार्डों में तो भाजपा की टिकट के कई दावेदार सामने रहे हैं। वार्ड-19 में सबसे ज्यादा 6 दावेदार, वार्ड-21 से 5 और 23 से 5 दावेदार सामने चुके हैं। ऐसे में पार्टी के लिए टिकट देने का फैसला काफी कठिन होने वाला है। यही नहीं वार्ड-15 और वार्ड-16 में पार्टी के दिज्गज वर्कर आमने-सामने हैं। इन वार्डों में हालात सबसे विकट दिखाई दे रहे हैं। पार्टी नेता किसी एक को टिकट देकर दूसरे को नाराज करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहते, अगर इन वार्डों से एक वर्कर नाराज हो जाता है तो उसका नुकसान चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
बटाला | परिषदचुनावों को लेकर वैसे तो लड़ाई अकाली-भाजपा और कांग्रेस के बीच है। लेकिन जैसे ही परिषद चुनाव पास गए है, अकाली और भाजपा में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की लड़ाई ने भी जोर पकड़ लिया है। इसपर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। हाईकमान की तरफ से इस पर कोई फैसला नहीं लेने पर यह चर्चा का कारण बना हुआ है। चुनाव को लेकर अपने ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतारने का दावा करने वालों में का कितना सच और कितन झूठ है, लोग उत्सुकता से जानने के लिए बेताब हैं। शुरू से ही बटाला भाजपा के खाते की सीट रही है और साल 2012 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन पार्टियों ने सीट की अदला बदली के कार्यक्रम के तहत बटाला को अकालियों के खाते में डाल दिया था। अब अकाली दल पूरे शहर की राजनीति पर कब्जा करना चाहता है तो भाजपा अपना कब्जा किसी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है। इस पॉलिटिकल ड्रामे का एक पहलु यह भी है कि अकाली तो एकजुट होकर अपना ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का डंका बजा रही है।
वहीं, भाजपा में गुटबंदी चल रही है। दोनों ही अलग प्लेटफार्म से शिअद को ललकार रहे हैं। आलम यह है कि लोगों भी जानने को उत्सुक हैं कि दावे ठोकने वालों में कितना दम है। दूसरी तरफ कांग्रेस इस मसले पर मौन है।