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ऐसे पार्षदों को चुनें, जो शहर की समस्याएं हल करवा सकें

6 वर्ष पहले
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बटालामें भी हजीरा बाग में सुबह सैर करने पहुंचे लोगों की जुबां पर कौंसिल चुनावों को लेकर चर्चा रही।

सीनियर बिजनेसमैन और आईटीआई गुरदासपुर के चेयरमैन हरिकृष्ण त्रेहन कह रहे थे कि जिस प्रकार शहरवासियों को विकास की जरूरत है,उसके लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को जनता की भावना और जरूरत को समझ कर ही सामने आना चाहिए। अगर केवल राजनीति ही करनी है तो उसके लिए और भी पद और काम है। बतौर पार्षद उनको केवल जनता के भले के लिए काम करना होगा।

उनके साथ चल रहे बिजनेसमैन मनोज खोसला ने कहा कि सरकार ऐसा सिस्टम बनाए जिसमें पार्षदों को काम करना ही पड़े, क्योंकि एक पार्षद ही है जो वार्ड स्तर की समस्याओं को परिषद और फिर आगे परिषद सरकार तक पहुंचाती है। अगर पार्षद की जिम्मेदारी निश्चित कर दी जाए तो बहुत कुछ ठीक हो सकता है,तभी ईंट भट्ठा चलाने वाले अशोक महाजन बोले कि अगर परिषद मोहल्लों में सीवरेज,नालियां, सफाई, स्ट्रीट लाइटों को ही ठीक नहीं करवा सकती तो उनके पार्षद बने रहने का क्या फायदा। यह पद जनता की मुश्किलें हल करने और उन्हें सुविधाएं देने वाला है। अगर समस्या हल हो तो पार्षद पद किस काम का रह जाता है और लोग वोट डालने के बाद खुद को ही कोसते हैं। अशोक कुमार ने कहा कि जनता को मूलभूत सहूलियतें देना परिषद और दिलाना पार्षदों का काम है। पानी, सीवरेज,साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर पार्षदों को जिम्मेदारी से काम होगा।

गुरदासपुर |नगरकौंसिल चुनाव को लेकर इन दिनों हर तरफ सियासी सरगर्मियों का दौर चल रहा है। खासकर शहर के पार्कों में सैर के लिए आने वाले बुजुर्गों में तो इसे लेकर आम चर्चा सुनने को मिल जाती है। इस दौरान कई बातें निकलकर सामने रही हैं।

शहर के फिश पार्क में सैर करने पहुंचे बिजनेसमैन मनजीत सिंह गोराया बोले कि शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। सफाई कर्मचारी केवल त्योहारों वाले दिन ही दिखाई देते हैं। उसके बाद कहां चले जाते हैं कोई नहीं जानता। इसके लिए एमसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि शहर साफ रह सके। इसी तरह रिटायर्ड लेक्चरर बनारसी लाल महाजन बोले कि सीवरेज की समस्या हर इलाके में है। कूड़ा कई दिनों तक पड़ा रहता है, लेकिन इसे उठाया ही नहीं जाता। दस-दस दिन बीत जाते हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। लोगों को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए जो उनकी समस्याओं का समाधान करा सके। टीचर महिंदर पाल उनकी बात काटकर बोल पड़े कि लोग भी क्या करें, हर प्रत्याशी जीतने के बाद जनता को धोखा दे देता है। पहले तो सभी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। ऐसे मेें आखिर विश्वास किस पर किया जाए। बैंक कर्मी मनोहर लाल बोले कि शहर में समस्याओं का अंबार है, लेकिन इनका समाधान करने वाला कोई दिखाई नहीं देता। खासकर गलियों में कूड़ा बिखरा रहता है। लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि उसे ही वोट देंगे, जो साफ छवि का हो और उनकी समस्याएं हल कर सके। रिटायर बैंक मैनेजर बूटी राम भी इन सभी बातों से सहमत दिखाई दिए। इसी दौरान बैंक मेनेजर पीसी थापा बोल पड़े कि शहर के पार्कों की हालत भी कुछ ठीक नहीं है। इनके रख-रखाव की ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। इसी बीच जसबीर सिंह बोले कि लोगों का कोई कसूर नहीं है क्योंकि वे तो अपनी तरफ से सही उम्मीदवार को चुनते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे पल्ला झाड़ लेते हैं।

इन दिनों चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। ऐसे में जहां दो-चार लोग इकट्‌ठा होते हैं राजनीति की बातें शुरू हो जाती हैं। हर कोई एक-दूसरे का व्यू जानना चाहता है। ये चर्चा सरकार की गतिविधियों, बटाला और गुरदासपुर की नगर कौंसिल की कारगुजारी, अपनी वार्ड के पार्षद की कार्यप्रणाली और शहर की हालत के लिए जिम्मेदारी को लेकर होती है। बुधवार को दैनिक भास्कर ने गुरदासपुर के फिश पार्क और बटाला के हजीरा पार्क का दौरा कर सैर करने आए लोगों से चुनावी मैदान में खड़े हाेने वाले उम्मीदवार कैसे होने चाहिए और किन्हें वोट देंगे, इस पर चर्चा की गई।