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कच्ची गलियों, वाटर सप्लाई व्यवस्था में सुधार की दरकार

6 वर्ष पहले
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शहर के लोग प्राथमिक सुविधाओं से आज भी वंचित हैं। किसी इलाके में वाटर सप्लाई की समस्या है तो कहीं लोग सीवरेज जाम से परेशान हैं। कई इलाकों में काफी लंबे समय से गलियों का निर्माण ही नहीं हो पाया। इसके चलते इन इलाकों में हलकी बारिश से ही दलदल की स्थिति बन जाती है। लोग कौंसिल से इन समस्याओं का स्थाई समाधान चाहते हैं। बेरोजगारी बहुत बढ़ चुकी है और सरकार बटाला का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को चाहिए कि वह इस और गंभीरता से सोचे और रोजगार के अवसर पर प्रदान करवाए।

लवीश, जॉब,बटाला

^जिस प्रकार केंद्र राज्य सरकार के साथ एनजीओज पैसे खर्च करके युवाओं को अवेयर करने का प्रयास कर रहे है। उस हिसाब से इसका रिजल्ट नहीं रहा। कहां कमी है और इसका जरूरत के अनुसार रिजल्ट कितना होना चाहिए। यह सब सरकार की जिम्मेदारी है।

नितिन कुमार, जॉब,बटाला

^ बटाला में इंडस्ट्री वैसे तो डूब चुकी है, जिससे रोजगार बहुत बड़े स्तर पर खत्म हो गया। अभी भी सरकार को चाहिए कि प्रयास करके बटाला इंडस्ट्री को जीवन दान दे, ताकि रोजगार निकल सके और पढ़े लिखे युवा जो बेरोजगार घुम रहे है, उनको रोजगार मिल सके।

प्रिंस बब्बर, ज्वेलर,बटाला

^ नशा और बेरोजगारी का बोलबाला है। इस इलाके का विकास होने के पीछे बेरोजगारी और नशा सबसे बड़ा रोड़ा है। सरकार की ओर से नशे के खिलाफ काम करना सही है,पर इसमें नशा करने वालों को पकड़ा जा रहा है और बड़ स्तर पर नशा करने वाले काबू नहीं रहे।

पंकज, ज्वेलर,बटाला

^ वार्ड की बात करें तो सफाई को लेकर कौंसिल की तरफ से कोई खास काम नहीं किया जाता,अगर रूटीन में काम हो तो गंदगी नहीं हो सकती। दूसरा ट्रेफिक की समस्या बहुत ज्यादा है। शहर में किसी भी रोड पर अथवा बाजार जाएं तो जाम का सामना करना पड़ता है।

केशव हांडा, कारोबारी,बटाला

^ साफ सफाई होना इलाके की मुख्य मांग है, परंतु इसके बावजूद हर तरफ बुरा हाल है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चाहिए कि अपनी ड्यूटी समझें और काम करें। जिसके लिए अधिकारियों को भी चाहिए वह कर्मीयों पर सख्ती करे।

योगेश कुमार, इंस्ट्रक्टर,गुरदासपुर

^शहर में स्ट्रीट लाइट का बुरा हाल है। ये कभी-कभार ही जलती हैं। इसकी ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि कई जगह पर लाइट का व्याप्क प्रबंध है, लेकिन गलियों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पूरी तरह से बेहाल है।

विनोद कुमार, सुपरिंटेंडेंट,गुरदासपुर

^ शहर की सबसे बड़ी समस्या साफ-सफाई की है। कई दिनों तक कूड़ा गलियों में ही पड़ा रहता है, इसे उठाने के लिए कोई नहीं पहुंचता। हलकी सी बारिश होने पर ही कूड़ा गीला होकर बद्बू मारने लगता है। नगर कौंसिल को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

रमन शर्मा, अध्यापक,गुरदासपुर

^ शहर में तीन पार्कों में से दो की हालत बेहद खराब है। शहर के बुजुर्ग लोगों के लिए घूमने के लिए केवल एक ही फिश पार्क है। शहर में कौंसिल को अच्छे पार्क का निर्माण कराना चाहिए ताकि जहां बुजुर्ग लोगों को सुविधा मिल सके।

कंवर नौनिहाल, इंस्ट्रक्टर,गुरदासपुर

^ शहर में पानी की निकासी की सबसे बड़ी समस्या है। नालियों की सफाई होने के कारण गंदा पानी नालों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे ये गलियों में ही फैला रहता है। बारिश के दिनों में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं।

जसबीर सिंह, अध्यापक,गुरदासपुर

^ वैसे तो शहर की अहम समस्या पानी का निकास और साफ-सफाई की कमी है। इसके अलावा गलियों की हालत भी कुछ खास ठीक नहीं है। गलियों का काफी समय से निर्माण नहीं हो पाया, जिसके चलते गड्ढे बने हुए हैं। कौंसिल को निर्माण कराना चाहिए।