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मेरी मां अस्पताल में थी टक्कर मारने वाले राजीनामा करने के लिए दबाव बना रहे थे

7 वर्ष पहले
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मेरीमां अस्पताल में जिंदगी मौत की लड़ाई लड़ रही है। 21 अगस्त को सड़क हादसे में जख्मी किला बरूण की बिमला पाल की हालत अच्छी नहीं है। बिमला की बीए पार्ट वन में पढ़ने वाली बेटी निशा ने बताया कि 21 अगस्त को रोज की तरह सुबह करीब पौने आठ बजे मां बिमला उसे एक्टिवा पर राम कालोनी कैंप बस में चढ़ाने आई थीं। वह डिवाइडर पर खड़ी थीं। इसी दौरान एक तेज रफ्तार इनोवा गाड़ी ने एक्टिवा को टक्कर मार दी। मां सड़क पर गिर गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं। निशा चिल्लाती रही लेकिन टक्कर मारने वाली गाड़ी नहीं रुकी। निशा ने घटना की सूचना पिता धमेंद्र पाल और भाई वरिंदर पाल को दी। इसके बाद बिमला को निजी अस्पताल में दाखिल किया गया।

निशा ने बताया कि उन्होंने हादसे की शिकायत सदर थाने में दी लेकिन पुलिस ने दो दिन तक पर्चा नहीं किया। पुलिस केवल मामला सेटल करवाने में लगी रही। एक्साइज विभाग के भी 6-7 लोग अस्पताल पहुंच मामला सेटल करने के लिए कहने लगे। बाद में पुलिस ने यह मामला टक्कर मारने वाले चालक गुरजिंदर पाल पुत्र राम किशन निवासी बोदलां दसूहा के खिलाफ धारा दर्ज किया। जब पुलिस ने तेजी से काम नहीं किया तो बिमला पाल के बेटे वरिंदर ने टोल प्लाजा से गाड़ी का नंबर पता किया। गाड़ी शहर के मारबल व्यापारी और शराब के ठेकेदार नरेश अग्रवाल की निकली। नरेश अग्रवाल कहते हैं कि उन्होंने अपनी गाड़ी ईटीओ कंग को 5-6 दिन के लिए दी थी। उन्हें इस हादसे का बाद में पता चला। वह परिवार के मैंबरों से बिमला पाल के पति धमेंद्र पाल से मिले थे। बिमला पाल को इस हादसे में काफी चोट लगी थी। हालांकि ईटीओ कंग से जब बात की गई तो उन्होंने पहले तो आनाकानी की परंतु बाद में साफ कह दिया की मेरा ड्राइवर है ते मेरी गढ्डी है।

बिमला पाल की बेटी नीशा पाल आपबीती बताती हुई।