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जालंधर-पठानकोट फोरलेन के 154 करोड़ के अवार्ड पर आर्बिटेटर ने रोक लगाई

7 वर्ष पहले
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जालंधर-पठानकोटफोरलेन प्रोजेक्ट के लिए 154 करोड़ रुपए के अवार्ड के खिलाफ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की अपील के बाद आर्बिटेटर डिवीजनल कमिश्नर आर वेंकटर|म ने एसडीएम दसूहा के फैसले पर रोक लगा दी है। आर्बिटेटर ने अपने आदेश में कहा है कि एसडीएम दसूहा की तरफ से अवाॅर्ड जल्दबाजी में तय किए गए हैं। बहुत सारे जमीन मालिक सफर कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने आदेश को एसडीएम ने गलत तरीके से लिया है। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ताओं की सुनवाई करने की कोई बात नहीं कही है।

इस बारे में एनएचएआई के वकील कुलबीर सिंह मिनहास ने बताया कि हाईवे अथॉरिटी के जालंधर-पठानकोट फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए रास्ते में एक्वायर की जाने वाली जमीन के उजाड़ा भत्ता ब्याज के खिलाफ किसानों ने हाईकोर्ट में केस किया था। इन किसानों की संख्या लगभग 150 थी। किसानों ने इस मुआवजे को ठीक नहीं बताया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला लेने के लिए अधिकार संबंधित जिला प्रशासनिक अधिकारी को दे दिए। कहा कि पैसे उतना रिलीज करो, जितना बनता है। इसे तीन महीने में डिसाइड करो और एक महीने में पैसा रिलीज करो।

वकील मिनहास ने बताया कि एसडीएम दसूहा ने अवार्ड मामले की जांच की। उन्होंने अपनी रिर्पोट में लिख दिया कि किसी भी शिकायतकर्ता की अपील सुनने लायक नहीं है। रास्ते में आने वाले सभी गांवों को मुआवजा मिलना चाहिए और उन्होंने 154 करोड़ 64 लाख और 13 हजार 372 रुपए के अवार्ड पर घोषित कर दिए। एनएचएआई ने इस फैसले को ठीक नहीं माना और इसे दोबारा सुनवाई करने के लिए हाईवे के आर्बिटेटर डिवीजनरल कमिश्नर आर वेंकटर|म को शिकायत की। उन्होंने सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला एनएचएआई के हक में सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में इस अवार्ड को दोबारा निर्धारित करने के लिए कहा और साथ ही सभी जमीन मालिकों की सुनवाई करने का आदेश दिया।