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1971 की जंग में शहीद हुए हरदेव नैय्यर की पुण्यतिथ आज

7 वर्ष पहले
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शहीद हरदेव पाल नैय्यर की याद में गेट बनाने की मांग

भारत-पाक युद्ध 1971 में शहीद हुए हरदेव पाल नैय्यर की 44वीं पुण्य तिथि शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। हरदेव को जन्म 17 अगस्त 1947 को गोपाल दास नैय्यर के घर में हुआ। 6 दिसंबर 1970 को वह भारतीय सेना में बतोर लेफ्टिनेंट भर्ती हुए थे। भारत-पाक युद्ध में हरदेव को बतौर प्लाटून कमांडर पश्चिमी क्षेत्र के युद्ध मोर्चे पर अमृतसर के समीप फतेहपुुर में मोर्चे की कमांड संभालने का आदेश प्राप्त हुए। फतेहपुर गांव जो हमेशा से ही पाक के कब्जे में रहा, मजबूत बंकरों से सुसज्जित था। हरदेव ने बंकरों में िछपे हुए पाकिस्तानियों ने स्वचालित हथियारों से गोलियों की बौछार कर दी। वरी हरदेव गोलियों की परवाह करते हुए, रेंगते हुए आगे बढ़े और दुश्मनों के दो बंकरों को ग्रेनेड से तबाह कर दिया। तीसरे बंकर की ओर बढ़ते हुए दुश्मन द्वारा मीडियम मशीनगन से गोलियां चलाई जा रही थी।

हरदेव ने मीडियम मशीनगन खींच ली और बंकर को तबाह कर दिया। छीना झपटी में एक ब्रस्ट हरदेव के सिर पर लगा, िजससे वह बुुरी तरह घायल हो गए। हरदेव ने पाक चौकी पर कब्जा कर लिया लेकिन वह शहीद हो गए। पाक सैनिक चौकी पर 12 एमएमजी, 11 एसएलआर, 9 कारबाइन, 2 रीकोइल लैस गन, 1 जीप, 2 रेडियो सैट और एक टैलीसैट छोड़कर भाग गए। तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा था। पंजाब सरकार औरं नगर कौंसिल दसूहा ने शहीद की याद में तालाब रोड का नाम बदल कर शहीद हरदेव पाल नैय्यर मार्ग तो कर दिया लेकिन यादगारी गेट बनाने का काम अभी बाकी है।

शहीद के परिवार वाले गेट बनाने की मांग करते हुए।

शहीद सैकंड लेफ्टिनेंट हरदेव पाल नैय्यर की शहादत के गौरव के साथ जी रहे शहीद के परिवार को इस बात का मलाल है कि सिविल सरकारों ने शहीद को वो सम्मान नहीं दिया, जो मिलना चाहिए था। शहादत के 41 साल बाद पंजाब सरकार और नगर कौंसिल ने तालाब रोड का नाम बदल कर शहीद के नाम रखा। उन्हें इस बात की आशंका है कि कही घोषणाओं के बावजूद उक्त मार्ग पर यादगारी गेट बनाने में भी कई साल लग जाए। शहीद हरदेव के छोटे भाई रघुविंदरपाल नैय्यर, गौरव नैय्यर, भाई शशि बाला अन्य पारिवारिक सदस्यों ने गौरव के साथ शहीद की यादों को सांझा करते बताया कि समय-समय की सरकारों के विपरीत सेना ने उन्हें बेतहाशा सम्मान दिया है। शहीद हरदेव के बाद हाला