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विजय ढोलेवाल

6 वर्ष पहले
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शहर में विकास किया है तो दिखाई क्यों नहीं देता

कमल आनंद

एडवोकेट

डॉ. एएस मान

ओपी

अरोड़ा

वार्डों में करोड़ों रुपए के विकास कराए

नगर काउंसिल अध्यक्ष का दावा

2008 से 2013 तक नगर काउंसिल संगरूर पर पहले कांग्रेस का और बाद में अकाली-भाजपा का कब्जा रहा है। कांग्रेस के हरसंब लाल ने पहले दो वर्ष प्रधान पद की कुर्सी संभाली। हरबंस लाल का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में नाभा गेट, सुनामी गेट समेत मुख्य सड़कों का निर्माण करवाया है। इसके अतिरिक्त पानी के लिए तीन टयूबवैल लगवाए गए हैं। इसके बाद कांग्रेस के दीपक अग्रवाल करीब एक वर्ष तक कार्यकारी प्रधान रहे। इस दौरान कमेटी पर गुटबाजी हावी रही। इसके बाद अकाली दल के इकबालजीत सिंह पूनियां ने नगर काउंसिल की बागडोर संभाली। पूनियां का दावा है कि उन्होंने करोड़ों रुपए सीवरेज व्यवस्था, सड़कों, स्ट्रीट लाईटों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए हैं। नगर काउंसिल की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर गंदे नाले को कवर करवाया जा रहा है। नगर काउंसिल की ओर से पूरे शहर में 21 टयूबवैल लगाए गए हैं। पांच नए टयूबवैल लगवाए गए हैं। शहर के हर वार्ड में गलियां और नालियों को करोड़ों रुपए खर्च कर पक्का किया गया है।

विकास के ढोल-जनता खोलती पोल

शहर में ट्रेफिक की व्यवस्था को सुधारने में नगर काउंसिल पूरी तरह से फेल रही है। मौजूदा समय में लोग बाजारों में निकलने से कतराने लगे हैं। शहर में सुनामी गेट, धूरी गेट में सबसे अधिक ट्रेफिक जाम रहता है। प्लान बनाने के दावों के बावजूद शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई है। वोट की राजनीति के कारण अवैध कब्जों ने समस्या को अधिक हवा दी है। रात के समय सड़कें चौड़ी दिखाई देती हैं परंतु दिन में अस्थाई कब्जों से सड़कें सिकुड़ जाती हैं। इससे निजात कोई नहीं दिला रहा।

शहर में सफाई व्यवस्था पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। शहर के भीतर ही कई स्थानों में गंदगी के डंप बना दिए गए हैं। जिस कारण शहर में गंदगी पसरी रहती है। सफाई के लिए कोई सही कदम नहीं उठाए गए हैं। शहर को साफ और हराभरा बनाने का वादा कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। शहर में पुरानी सब्जी मंडी, रणबीर कॉलेज रोड, अस्पताल रोड आदि स्थानों पर सबसे अधिक गंदगी पसरी रहती है। गंदगी के कारण शहरवाीसी लंबे समय से जूझ रहे हैं, लेकिन किसी को दिखाई नहीं देता।

शहर में सौ प्रतिशत सीवरेज व्यवस्था के दावे तो किए जा रहे हैं परंतु पुराना सीवरेज नगर काउंसिल से संभाला नहीं जा रहा है। जिस का प्रमाण जेपी कालोनी समेत सलम बस्तियों में सीवरेज जाम रहने की शिकायतों से मिलता है। नगर काउंसिल शहर के लेागों को निकासी के पुख्ता प्रबंध देने में पूरी तरह नाकाम रही है। सीवरेज जाम होने पर नगर काउंसिल की ओर से कोई सुनवाई नहीं की जाती है। लोग निजी तौर पर रुपए खर्च कर जाम सीवरेज को खुलवाने के लिए मजबूर हैं।

शहर में लोगों को पीने के स्वच्छ पानी के लिए जो वायदे किए गए वो कागजों तक ही सीमित हैं। इसका प्रमाण प्रताप नगर और शेखूपुरा बस्ती में पानी की सप्लाई पूरी तरह नहीं पहुंचना है। हालात ऐसे हैं कि पानी लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा है। सर्दियों में भी लोग घरों के बाहर नल खोलकर पानी लेने को मजबूर हैं। उनके यहां पानी की समस्या है तो दूसरे वार्ड में क्या उम्मीद की जा सकती है। शहर की टूटी सड़कें शहर के विकास को खुद बयान कर रही हैं।