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अपने आसपास रखें पैनी नजर, आसान होगा गलत लोगों को पकड़ना
बेंगलुरू की घटना : आठवींमें पढ़ने वाला 14 साल का आर किरण यादव 4 फरवरी को लापता हो गया था। वो भी घर से सिर्फ 200 मीटर दूर भीड़-भाड़ वाले बस स्टॉप से। तीन दिन बाद उसका क्षत-विक्षत शव मिला। किरण के पैरेंट्स ने पड़ोसी मंजूनाथ पर शक जताया, लेकिन पुलिस ने उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया। कुछ दिन पहले किरण की मां ने मंजूनाथ की मां को कॉलोनी की ही एक विवाहिता की ओर उसके झुकाव की शिकायत की थी। मंजूनाथ के घर में इसे लेकर झगड़ा हुआ था। इसी वजह से किरण के पैरेंट्स को मंजूनाथ पर शक था। किरण के पिता रवि कुमार को पुलिस पर भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने अपने स्तर पर तहकीकात शुरू की। तीन दिन तक हर दुकान पर गए, सीसीटीवी फुटेज देखे। 60 से ज्यादा फुटेज देखने के बाद उन्हें एक शॉट दिखा। फुटेज 4 फरवरी की ही थी और मंजूनाथ बाइक पर किरण को ले जा रहा था। पुलिस ने मंजूनाथ को पकड़ लिया। उसने उसी दिन ब्लेड खरीदा था और किरण से कहा था कि उसके भाई का एक्सिडेंट हो गया है, अस्पताल चलना है। किरण ने सोचा ये अच्छा मौका है, मैं मंजूनाथ की मदद करूं तो शायद दोनों परिवारों में आई खटास कुछ कम हो। उसके दिमाग में मंजूनाथ की शिकायत वाली घटना थी।
मंजूनाथ उसे सुनसान इलाके में ले गया। किरण ने खतरा भांपकर गुहार लगाई। बोला- ‘मैंने आपका क्या बिगाड़ा है भैया? तुम्हारी लड़ाई तो मेरी मम्मी से है। प्लीज मुझे जाने दो।’ बावजूद इसके मंजूनाथ ने उसका गला काट डाला। पास ही छोटी नदी पर जाकर खून से सने अपने हाथ और कपड़े धो डाले।
लखनऊकी घटना : 1फरवरी को लॉ की छात्रा 19 साल की गौरी श्रीवास्तव लापता हो गई थी। अगले दिन लोगों ने देखा कि कुत्ते एक बोरे को नोच रहे हैं, जिससे शरीर के टुकड़े-टुकड़े निकल रहे थे। दुर्भाग्य से ये गौरी का क्षत-विक्षत शव था। लखनऊ पुलिस ने भी वही किया जो बेंगलुरू पुलिस ने किया था। आसपास के सीसीटीव फुटेज खंगाले और उसे एक लड़के की मोटरसाइकिल पर देखा। लोगों के बढ़ते दबाव के बीच पुलिस ने हफ्तेभर बाद एक घर पर छापा मारा। 23 साल के हिमांशु प्रजापति और उसके दोस्त अनुज गौतम को गिरफ्तार कर लिया गया। वो आरी भी बरामद की, जिससे कथित तौर पर गौरी के टुकड़े किए गए थे।
पुलिस ने इसे प्यार और धोखे में की गई हत्या बताया। गौरी के मोबाइल से कुछ आपत्तिजनक मैसेज और तस्वीरें मिलने का भी दावा किया गया। पुलिस के मुताबिक पहले गौरी को गला दबाकर मारा गया, बाद में शरीर के टुकड़े किए गए। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि टुकड़े किए जाते वक्त गौरी जिंदा थी। हत्या गला दबाकर नहीं की गई। तीन दिन बाद लोकल टीवी चैनलों ने एक खुलासा किया। दो पुलिसकर्मियों को आरोपियों के घर छापा मारने से ठीक 12 घंटे पहले आरी खरीदते दिखाया। उसी दुकान से, जहां से आरोपियों के आरी खरीदने की बात कही गई थी। यूपी पुलिस की आधी-अधूरी जांच के चलते लोगों का भरोसा उस पर से उठ गया है। पुलिस जांच को प्रभावित करती है। इस तथ्य को इससे भी बल मिलता है कि वह आरोपी को रिमांड पर लेने या घटनास्थल से बरामद हथियार और दूसरे सैंपल बिना देरी फॉरेंसिक टेस्ट के लिए भेजने में रुचि ही नहीं दिखाती।
फंडायह है कि...
अगरआप गलत लोगों को पकड़ना चाहते हैं तो अपने आसपास की दुनिया या कम से कम अपने काम की जगह पर पैनी नजर रखिए। संभव है इस तरह समाज से गलत लोग खत्म भी हो जाएं।