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भक्ति से प्राप्त होगी आत्मिक शक्ति: मुनि

7 वर्ष पहले
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सत्यप्रकाश महाराज ने एसएस जैन सभा धूरी में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान के मानव जीवन की सार्थकता तभी होती है, यदि उसमें भक्ति का रस होता है। भक्ति करने से व्यक्ति को आत्मिक शांति प्राप्त होती है जोकि उसे संसार के दुखों से पार पाने में मदद करती है।

उन्होंने कहा कि भगवान द्वारा कलियुग में उत्थान के लिए भक्ति का मार्ग बताया गया है, इससे सारी बाधाएं अपने आप दूर होने लगती है। उन्होंने कहा कि चंदना द्वारा भगवान की भक्ति करने पर उसकी बेडिय़ां स्वयं टूट गई, हनुमान जी ने श्री राम की भक्ति करी तो वे समुद्र लांघ गए। उन्होंने कहा कि समर्पण भाव से की गई भक्ति से ही व्यक्ति को पूर्ण फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि मोक्ष के चार द्वारों में से चौथा द्वारा भावना का बताया गया है। उन्होंने कहा कि भावना हमेशा भक्ति भाव से भरी होनी चाहिए जिस तरह शबरी की राम के लिए, लक्ष्मण की राम के लिए तथा हनुमान जी की श्री राम के लिए थी। उन्होंने भक्ति को सद्गति का मार्ग भी बताया। इस मौके समकित मुनि महाराज ने भी अपने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। (राजेश टोनी)