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संस्कारों की भाषा है संस्कृत : डा. प्रभात सिंह

7 वर्ष पहले
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स्वामीस्वतंत्रानंदमेमोरियल कालेज दीनानगर के संस्कृत विभाग की ओर से प्रिंसिपल डा. आरके तुली की अध्यक्षता में सेमिनार आयोजित किया गया। जिसमें विश्वेश्वरानंद वैदिक शोध संस्थान साधु आश्रम होशियारपुर के डॉ. प्रेम लाल शर्मा मुख्यवक्ता के तौर पर शामिल हुए। डा. प्रभात सिंह कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।

प्रिंसिपल आरके तुली ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कालेज में संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों को एक हजार रुपए की वजीफा राशि प्रदान की जाती है। संस्कृत भारत की ही नहीं पूरे विश्व की प्राचीन भाषा है।

मुख्यवक्ता डा. प्रेम शर्मा ने बताया कि संस्कृत भाषा विश्व की प्रज्ञा और प्राण है। यह संस्कारों की भाषा है और इसने भारत की अस्मिता को बाँध कर रखा हुआ है। प्राचीन ग्रंथों का निर्माण इसी भाषा में होने के कारण इसे वेद भाषा का दर्जा प्राप्त है। जबकि एशिया से यूरोप तक यदि किसी ने जीने की कला सिखाई तो वह संस्कृत भाषा है। कालेज की ओर से मुख्यातिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. राजन हांडा ने मंच का संचालन किया। इस मौके पर डा. अनीता शर्मा, प्रोफेसर शुभ किरण, प्रो. प्रबोध ग्रोवर, प्रो. कमल, प्रो विशाल, मैडम कवलजीत, गुरमीत कौर आदि उपस्थित थे।

मुख्यातिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते विभागाध्यक्ष अन्य।