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किसान सहायक फसलों को अपनाएं

7 वर्ष पहले
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फतेहगढ़ साहिब। खेतीके काम में विभिन्नता लाने पर ही इसे लाभकारी बनाया जा सकता है। गेहूं और धान का उत्पादन अपनी चरम सीमा पर है और इसे और अधिक बढ़ाना कठिन है। इसलिए किसानों को दूसरे सहायक काम भी अपनाने होंगे।

यह बात एडीसी बलजीत सिंह संधू ने जिला कृषि महकमे की ओर से नई अनाज मंडी में जिला स्तरीय किसान सिखलाई कैंप में किसानों से कही। उन्होंने कहा कि कम हो रहे पानी के स्तर को संभालने के लिए उन फसलों को उगाया जाए जिनमें पानी की लागत कम हो। फसल की बुआई से पहले मिट्टी की परख कराएं। खेती में आधुनिक तकनीक अपना कर ही कृषि में लागत को कम किया जा सकता है। किसान सहकारी सभाओं से मशीनरी किराए पर लें और अन्य मुनाफा देने वाली फसलों की पैदावार करें।

कृषि महकमे के डायरेक्टर डाॅ. मंगल सिंह ने कहा कि मौजूदा साल में 2 क्विंटल गेहूं का बीज सब्सिडी पर बांटा जाएगा। कृषि अफसर डाॅ. इंद्रपाल सिंह ने कहा कि जिले में गेहूं के क्षेत्रफल में से 1 हजार एकड़ में छोले, दालें और तेल बीज के काश्त का लक्ष्य रखा गया है। डाॅ. हरदयाल सिंह अन्य अफसर मौजूद रहे।

फतेहगढ़ साहिब में कृषि सिखलाई कैंप में मौजूद अफसर कृषि माहिर।