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नगर कौंसिल चुनावों को लेकर शहर में गर्म हुआ माहौल

6 वर्ष पहले
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फतेहगढ़ साहिब। 25फरवरी को होने वाले नगर कौंसिल चुनावों के मद्देनजर कंडीडेट्स ने इस रण में कूदने के लिए अपनी अपनी लंगोट कसनी शुरू कर दी हैं। इसके लिए पुराने सूरमाओं के साथ साथ नए उम्मीदवारों ने भी अपने समर्थकों से बैठकें कर संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

चुनाव मैदान में उतरने वाले लगभग सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने वॉर्ड के वोटरों की सूचियां तैयार कर ली हैं। इससे पता चल सकेगा कि कौन किस के हक में है। उम्मीदवार हर रोज दो चार समर्थकों को साथ लेकर अपने वॉर्ड के वोटरों से घर घर जाकर उन्हें रिझाने में जुट गए हैं और अपने हक में वोट डालने का आग्रह कर रहे हैं। विरोधी उम्मीदवारों के वोट बैंक पर सेंध लगाने के लिए उनके रिश्तेदारों और दोस्तों को अपनी ओर आकर्षित किया जा रहा है।

नएचहरों की दस्तक

कौंसिलचुनाव पार्टी के दम पर कम प्रत्याशी के अपनी पहचान के दम पर अधिक रहता है। पिछले चुनावों में भी किसी खास पार्टी के वर्कर होने के बावजूद आजाद उम्मीदवार के तौर पर कई प्रत्याशी चुनाव जीते थे। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा कौंसिल चुनावों में 40 से 45 के लगभग नए चेहरे भी आने वाले नगर कौंसिल चुनावों में पुराने जीते उम्मीदवारों को जोरदार टक्कर देने की तैयारी में हैं। इनमें सभी मुख्यों दल से आजाद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी शामिल हैं। वे भी अपने समर्थकों के साथ मीटिंग कर रूपरेखा तैयार करने में लगे हैं। सभी मुख्य दलों में एक-एक वॉर्ड से कई उम्मीदवार पार्टी टिकट के लिए अपनी दावेदारी पार्टी नेताओं को पेश कर रहे हैं। पार्टी टिकट किसे मिलेगा इस संबंध में किसी भी सियासी दल ने अभी तक कोई घोषणा नहीं की है। फिर भी सभी के हौसले पूरी तरह बुलंद हैं।

कई वॉर्डों में खुलकर विकास तो कुछ तरसते रहे विकास को

पिछलीकौंसिल में शिअद के पूर्व विधायक दीदार सिंह भट्टी के बेटे गुरविंद्र सिंह भट्टी पूरे पांच वर्ष तक काबिज रहे थे। उन्होंने शहर के विकास में इंटरेस्ट भी लिया। खुद के वॉर्ड का विकास छोड़ दूसरे वॉर्डों के विकास कार्यों में ही लगे रहे, जिससे उन्हें अपने वॉर्ड के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। कौंसिल में पक्षपात के रवैये के चलते कई वॉर्डों का विकास कार्य खुलकर हुआ तो कुछ वॉर्ड विकास के लिए तरसते रहे। कौंसिल के भंग होने से पहले शिअद में चल रही गुटबाजी के चलते करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के टेंडर रद्द हो गए, जिससे सभी वार्डों के विकास कार्य प्रभावित हुए। सबसे अधिक प्रभावित होने वाला कौंसिल अध्यक्ष भट्टी का ही वॉर्ड था। जहां विकास के लिए सबसे ज्यादा कार्य होने वाले थे।