स्टाफ की कमी से जूझ रही जिला लाइब्रेरी
फतेहगढ़ साहिब। बेरुखीका शिकार सरहिंद की जिला लाइब्रेरी में पुस्तकें इसलिए इशू करनी बंद कर दी गईं क्योंकि 30 सितंबर 2014 को लाइब्रेरियन के रिटायर होने के बाद कोई नई नियुक्त नहीं हुई। इतना ही नहीं लाइब्रेरी में पुस्तकों की देखरेख करने वाले रिस्टोरर भी रिटायर हो चुके हैं।
मात्र एक सेवादार है जो रीडर को अखबार पढ़ने तक की ही सुविधा दे पा रहा है। नियमों के मुताबिक उसे पुस्तकों को इशू करने का अधिकार ही नहीं है। जिला लाइब्रेरी के हालात का जायजा लेने के लिए डीसी कमलदीप सिंह संघा ने औचक निरीक्षण किया और लाइब्रेरी से संबंधित पूरी जानकारी हासिल की। जांच के दौरान डीसी इस बात से खफा नजर आए कि पुस्तकें क्यों इशू नहीं हो रहीं। उन्होंने डेपुटेशन पर तैनात की गई प्रोफेसर पूनम से बात की। पूनम ने 25 नवंबर 2014 को चार्ज जरूर लिया था पर उसके बाद लाइब्रेरी में आई ही नहीं। जब पूनम की ओर से भी बुक इशू को लेकर कोई उचित रिस्पॉन्स नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव डीपीआई पंजाब को पत्र लिखने की बात कही।
जिसमें बताया कि लाइब्रेरी को कैसे पूरे समय तक खोला रखा जा सकता है, ताकि पाठकों को पुस्तकें सामान्य रूप से इशू की जा सकें। जांच के दौरान लाइब्रेरी की देखभाल कर रहे सेवादार ने डीसी को बताया कि गत दो वर्षों से भी अधिक समय से अखबारों के बिल और रेडक्रॉस की इमारत जिसमें लाइब्रेरी चल रही है उसका किराया भी अदा नहीं हो पा रहा है।
20 वर्ष पहले बनी थी यह लाइब्रेरी
20वर्ष पहले बनी जिला लाइब्रेरी लगातार फंड की कमी से जूझती रही है। खुद की इमारत होने के चलते इसे किराए की इमारत में ही जैसे तैसे चलाया जा रहा है। जगह की भारी कमी होने के कारण इस इमारत में तो आने वाले पाठकों के लिए बैठने का ही उचित प्रबंध है और ही पुस्तकों को रखने के लिए पूरे रैक ही मौजूद हैं। लाइब्रेरी में मात्र छह ही अखबार आते हैं, जिनका भी दो वर्ष से अधिक समय से बिल नहीं अदा हो पाया। लाइब्रेरी में तैनात एक मात्र सेवादार स्वर्ण सिंह है। उसने बताया कि सरकारी लाइब्रेरी होने के चलते इसमें आने वाले पाठकों से कोई फीस तो नहीं ली जाती। 1995 से शुरू हुई लाइब्रेरी में पुस्तकों की संख्या तो बढ़कर 25 हजार के लगभग पहुंच चुकी है, लेकिन नई पुस्तकों की खरीद के लिए कोई बजट नहीं मिला।
जिला लाइब्रेरी में जांच करते हुए डीसी।