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हादसे के लिए अकाली नेता ही दोषी: रितु रानी

5 वर्ष पहले
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रंजीतके भाखड़ां में कूदने के बाद उसके परिवार वाले और गांव वाले अकाली नेता को ही हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि अकाली नेता गुरबख्श सिंह खुद को इससे पाकसाफ बता रहा है। रंजीत की प|ी रितुरानी ने कहा कि साल 2007 में उन्होंने बसी पठाना की को-ऑपरेटिव बैंक से 5 लाख का कर्ज लिया था। उसने कर्ज लेकर डेयरी का काम शुरू किया था। कुछ महीने बाद उसके एक के बाद एक पशु मरते चले गए। इसलिए वह कर्ज नहीं चुका सका।

प|ी के मुताबिक बैंक से कर्ज दिलाने में गुरबख्श ने मदद की थी। उसने उसके पति से साइन 5 लाख रुपए पर कराए थे, पर 4.50 लाख रुपए ही दिए थे। उसने 50 हजार का कोई हिसाब नहीं दिया था। रितु ने कहा कि बेशक गुरबख्श ने 13.80 लाख रुपए बैंक में जमा कराकर एक किल्ले जमीन की रजिस्ट्री करा ली थी। गुरबख्श का यह कहना कि 8 लाख रुपए उसके पति रंजीत ने किसी से लिए थे, उसका बयाना भी हुआ था, यह सरासर गलत था। तो उसके पति ने किसी से कोई बयाना किया था और दूसरा कर्ज लिया था। जब भी रंजीत, गुरबख्श से पैसे मांगता तो गुरबख्श कहता कि उसकी बाकी जमीन जो करीब एक किल्ले से कुछ ज्यादा है, उसकी रजिस्ट्री करा दे। पुलिस का यह कहना कि रितु ने बॉडी मिलने के बाद कार्रवाई करने की बात कही थी, गलत है। उसने किसी को कुछ भी लिखकर नहीं दिया। जो भी पुलिस कर रही है, वह गलत है।

पुलिस को सूचना देने के बाद सोमवार को रंजीत भाखड़ा में कूद गया था। पुलिस ने मौके से उसकी बाइक जब्त की थी। भाई सुरेन्द्र मोहन तथा जसवीर सिंह ने इसके लिए अकाली ब्लाक समिति सदस्य गुरबख्श सिंह को जिम्मेदार ठहराया था।

कर्ज में दबे खानपुर के किसान रंजीत सिंह के नहर में तीन दिन पहले लापता होने के चलते घर में शोक का माहौल। रंजीत की प|ी रितु रानी सदमे में थी। बेशक लोग रंजीत के भाइयों और रितु को हौसला कायम रखने की बात करते रहे हो, पर रितु की आंखें बार-बार छलक उठती थीं। परिवार के लोग नहर में लगातार उसकी बॉडी तलाश कर रहे हैं। जो अभी तक नहीं मिल पाई है।

रंजीत सिंह, फाइल फोटो।

1 लाख का कर्ज आठ लाख कैसे हो गया: भाई जसवीर

रंजीतके भाई जसवीर ने बताया कि गुरबख्श से उसकी एक किल्ले जमीन का सौदा उसके सामने ही 35 लाख रुपए में तय किया था। गुरबख्श ने बस्सी बैंक में उसकी डिफाल्टर मनी भी जमा कराई थी। उसने बताया कि गुरबख्श के अनुसार उसने एक लाख रुपए का कर्ज रंजीत को किसी से दिलवाया था। अगर मेरे भाई रंजीत ने 1 लाख रुपए कर्ज लिया भी था तो वह कर्ज 8 लाख कैसे हो गया।

एक भी किस्त अदा नहीं की थी रंजीत ने: बैंक मैनेजर

^को-आपरेटिवबैंक मैनेजर सुरजीत सिंह ने बताया कि रंजीत ने उनकी ब्रांच से 2007 में 5 लाख का कर्ज लिया था। एक भी किस्त लौटाने के चलते ब्याज बढ़ता गया। पूरी रकम 13.80 लाख हो गई थी। जिसे गुरबख्श और रंजीत ने चुकता कर दिया था। उसके जायदाद के पेपर क्लियर कर दिए गए थे। यह पूछे जाने पर कि लंबा समय बीतने पर कोई नोटिस नहीं दिया तो कहा कि बैंक ने नोटिस भेजे थे, जब किस्त अदा नहीं की तो रिकवरी के लिए केस भी किया गया था।

गांववालों ने बताया, आखिरी समय में रुपए मांग रहा था रंजीत

मंगलवारको गांव पहुंची भास्कर टीम को गांव के लोगों ने बताया कि रंजीत आर्थिक रूप से परेशान रहता था। वह इसके लिए कई बार रोया था। गांव वालों के मुताबिक उन्होंने गुरबख्श से उसके पैसे लेने को कहा था, जिससे वह अपना काम कर सके। जिस दिन रंजीत नहर में छलांग लगाने जा रहा था, तब भी फोन पर बात करते हुए रो रहा था। पैसे मांगने की विनती गुरबख्श से कर रहा था। उसके बाद अचानक रंजीत बाइक लेकर चला गया। बाद में पुलिस को रंजीत की बाइक नहर किनारे मिली थी।

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