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3 महीने में 68 में से 25 पानी के सैंपल फेल

7 वर्ष पहले
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लोगों को किया जा रहा जागरूक

हेल्थडिपार्टमेंट के सेनिटरी इंस्पेक्टर दर्शन सिंह ने बताया कि जिस किसी गांव या शहर का पीने के पानी का सैंपल फेल पाया जाता है तो डिपार्टमेंट के संबंधित अफसर को तुरंत पाइपों की सफाई कराने और पानी में क्लोरीन मिलाने को कहा जाता है। ताकि पानी में बैक्टिरिया पैदा हों। जिसके बाद डिपार्टमेंट फिर कुछ दिनों बाद उसी का सैंपल लेकर जांच करता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं। अगर फिर फेल होता है तो फिर से उक्त प्रोसेस को दोहराते हुए लोगों को पानी को उबाल कर और उसमें तय मात्रा में क्लोरीन डाल कर पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा आरओ सिस्टम से भी पानी शुद्ध किया जा सकता है।

भास्कर न्यूज |फतेहगढ़ साहिब

पीनेवालापानी अशुद्ध हो तो इससे डायरिया समेत अन्य भयानक बीमारियों के अधिक फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में पीने के पानी को लेकर की गई हल्की सी लापरवाही भी खतरनाक हो सकती है।

गांवों में हो रही पानी की सप्लाई को लेकर हेल्थ डिपार्टमेंट भी लोगों को जागरूक करता रहता है और समय समय पर सैंपल ले जांच करवाता है। ताकि पानी की शुद्धता का पता चल सके। हेल्थ डिपार्टमेंट से मिली जानकारी अनुसार डिपार्टमेंट ने मई 2014 में विभिन्न गांवों से 15 पीने के पानी के सैंपल लिए थे। जिनमें से लैब ने 6 सैंपल फेल करार कर दिए थे। डिपार्टमेंट ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यहां के पानी पीने के योग्य नहीं है। जिनमें गांव रुड़की, हरबंसपुरा, कुंभ, बसी, चनार्थल और बस्सी के सैंपल शामिल थे।

वहीं जून 2014 में भी डिपार्टमेंट ने विभिन्न स्थानों से लिए 28 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे थे, जिनमें से 11 सैंपल फेल हो गए थे। फेल करार दिए सैंपलों में 5 मंडी गोविंदगढ़, दो बस्सी पठानां, दो चरनाथल और एक एक सैंपल सरहिंद और बड़ाली आला सिंह से थे।

इतना ही नहीं डिपार्टमेंट ने जुलाई 2014 में जांच के लिए लैब भेजे 25 पीने के पानी के सैंपलों में से 8 फेल हो गए थे। जिनमें गांव कंजारी, भरपूरगढ़, सरहिंद, हंसाली, बीबीपुर, हिंदूपुर के अलावा दो सैंपल खेड़ा के थे। जबकि डिपार्टमेंट के पास अगस्त में भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट आनी बाकी है।