झुग्गी में रहने वाले बच्चों में जगाई शिक्षा की अलख
सरकारीप्राइमरी मॉडल स्कूल के सेंटर हेड टीचर ओम प्रकाश ने अपने जीवन के सेवाकाल में झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों में शिक्षा की अलख जगाई। उनकी मेहनत सदका आज 31 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मास्टर ओम प्रकाश ने पूरा जीवन झोपड़ पट्टी में रहने वाले गरीब परिवारों के 31 बच्चों को शिक्षा देने में लगा दिया।
हरसंघर्ष से मिली प्रेरणा
अायका स्त्रोत होने के कारण परिवार नवांशहर छोड़ कर फाजिल्का के गांव जमालके में बसा। ओम प्रकाश ने जेबीटी तक पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होते ही पहली पोस्टिंग 1977 में फिरोजपुर के गांव दबुर्जी में हुई। इसके बाद सीमावर्ती गांव चांदीवाला चला गया। ऐसा क्षेत्र जहां 10-12 किलोमीटर तक कोई स्कूल ही नहीं था। यहां पर करीब 12 वर्ष तक इसी स्कूल में सेवाएं निभाईं और आसपास के गांवों के उन सभी बच्चों को शिक्षित किया जो स्कूल होने का बहाना बना अनपढ़ता को बढ़ावा दे रहे थे। इसके बाद विभाग ने वापस दबुर्जी भेज दिया, वहां से हसन ढुट, खिलची जदीद के स्कूलों में ट्रांसफर हुईं। सबसे अधिक समय खिलची जदीद के स्कूल में बिताया। ओम प्रकाश 2011 में सेंटर हैड टीचर प्रमोट हुए सरकारी प्राइमरी मॉडल स्कूल फिरोजपुर सिटी गए। स्कूल के कुछ कदमों की दूरी पर रेलवे पुल के नीचे झोंपड़ पट्टी के बच्चों को मास्टर ओम प्रकाश ने शिक्षित करने की जिद्द ठानी। पहले साल 4 बच्चे बस्ती से पढ़ने स्कूल आए, उसके बाद साल दर साल यह संख्या बढ़ती गई और इस सेशन बस्ती के कुल 31 बच्चे इसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बस्ती की रहने वाली रोशनी इस समय स्कूल की सबसे होनहार और 5वीं कक्षा की छात्रा है। हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी हर विषय में अव्वल और अच्छे विचारों की धनी होने के कारण रोशनी अब तक 20 के करीब कहानियां लिख चुकी है।
रिटायरमेंट के बाद भी रहेगा जुनून
विभागीयनियमों अनुसार मास्टर ओम प्रकाश 31 मार्च 2016 को रिटायर होने जा रहे हैं। अगर एक्सटेंशन मिली तो जॉब में रहेंगे अन्यथा सेवामुक्ति के बाद अपनी जिद्द पालने का नया खाका मन में तैयार कर रखा है।
बातचीत करते हुए हैड टीचर ओम प्रकाश।