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बिना रेत की कीमत के ही काटी जा रही है सरकारी पर्ची, प्रशासन मौन
रेतेका बाजार ‘चिट्टा’ होने की बजाये दिन दिन ‘काला’ होता जा रहा है। माइनिंग विभाग द्वारा ‘फार्म टी’ के रूप में काटी जाती ‘वैटमेंट स्लिप’ में रेते की कीमत ही नहीं भरी जाती। यह खाना खाली पड़ा है।
जनरल मैनेजर-कम-माइनिंग अफसर फिरोजपुर मुक्तसर की मोहर नीचे जारी की रसीद नंबर 1093 तारीख 7 फरवरी 2015 1086 तारीख 9 फरवरी 2015 में तो पैसों का ईंदराज है ही टनों के हिसाब से मिनती। ग्राहक से पैसे लेकर खाली पैसों वाली रसीद दे दी जाती है।
इसके अतिरिक्त रेते का वजन सरकारी नीतियों तहत टनों फुटों की बजाए किलोग्राम के रूप में दर्ज है। असल में जो खड्डां माइनिंग विभाग ने गत वर्ष अलॉट की थी उनका भाव 350 रुपए वर्ग सैंकड़ों फुट है, जबकि नए रेट पर यह दर्ज 800 रुपए वर्ग सैकड़ा है। सूत्रों के अनुसार माइनिंग विभाग वाले वसूली 800 रुपए के हिसाब करते हैं। इसलिए वैटमेंट स्लिप पर रकम वाला खाना खाली छोड़ देते हैं। दूसरी ओर ‘दादा पर्ची’ वाले सड़क पर रेते के भरे प्रत्येक वाहन की 1500 रुपए की पर्ची काट देते हैं।
पर्चियों के इस गोलमाल का आम आदमी पर बोझ पड़ता है परंतु सरकार मूक दर्शक बनी बैठी है। मुक्तसर जिला उद्योग केन्द्र के जनरल मैनेजर गुरजंट सिंह सिद्धू ने बताया कि रेते की भराई का कार्य वर्ग सैंकड़ा फुट या टनों के हिसाब से होता है, किलोग्राम की कोई मिनती नहीं होती। इसी तरह कीमती भरनी भी जरूरी है बिना कीमत वाली पर्ची की कोई तुक नहीं बनती।
37में 9 खड्डे ही चल रहे हैं
इसकेअतिरिक्त खड्डों की गलत वितरण भी रेते की काला बाजारी को बढ़ा रही है। माइनिंग विभाग ने पंजाब में रेते की 37 खड्डों को मान्यता दी है, परंतु इसमें अभी तक सिर्फ 9 खड्डा ही चलती है। इसलिए बहुत सी खड्डों की दूरी बहुत ज्यादा होने कारण ढुलाई का खर्चा ज्यादा पड़ जाता है। जिस कारण लोग नजदीकी खड्ड से चोरी छुपे रेता निकालने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मुक्तसर, फरीदकोट, मोगा, फाजिल्का फिरोजपुर जिलों को जिला मोगा में पड़ती गांव संघेड़ा की खड्ड लगाई गई है, जोकि इस क्षेत्र से डेढ़ सौ से तीन सौ किलोमीटर से अधिक दूर है। जबकि जिला फाजिल्का के गांव अमीर खास में पड़ती खड्ड महज 40-60 किलोमीटर दूर है। अगर लोग मार्केट कमेटी द्वारा रेता खरीदते हैं तो उसका ढुलाई खर्चा चार गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि मुक्तसर की मार्केट कमेटी में बैठे कर्मचारियों ने नई नीति तहत 5 दिनों में एक भी पर्ची नहीं काटी। लोग अमीर खास खड्ड से रेता लाने को पहल देते हैं।
अमीर खास खड्ड माइनिंग विभाग के अधीन होने कारण इसका पुराना ठेका 350 रुपए वर्ग फुट का है जबकि नए रेट में रेता 800 रुपए सैकड़ा के हिसाब से बिकती है। इसके साथ ही अमीर खास खड्ड नई नीति में शामिल नहीं। इस कारण ढुआई ठेकेदार धक्के से ही इसकी 1500 रुपये की दादा पर्ची काट देते है। यहां से ही पूरा विवाद पैदा होता है। मार्केट कमेटी के सचिव गुरचरण सिंह ने बताया कि संघेडा खड्ड दूर होने कारण मुक्तसर का कोई भी खरीदार पर्ची नहीं कटवा रहा। (जसकरन)
बिंदा सिंह का मरणव्रत तीसरे दिन भी जारी, लोगों का समर्थन
इसदौरान मुक्तसर में रेता ढोने का कार्य करने वाले करीब डेढ़ सौ लोग भी बिंदा सिंह के मरणव्रत संघर्ष में शामिल हो गए हैं। बिंदा सिंह का मरण व्रत दूसरे दिन में दाखिल हो गया है। मालवा ट्रैक्टर यूनियन के प्रधान सुखासिंह, किशन सिंह, हरी सिंह, अंग्रेज सिंह, जोगिंदर सिंह, रजिंदर सिंह अन्यों ने बताया कि माइनिंग विभाग की काटी पर्ची को दादा ग्रुप नहीं मानता अपनी 1500 रुपए की पर्ची काट देते हैं। अगर कोई बिना पर्ची कटवाने से पकड़ा जाता है तो उसका 5-7 हजार रुपए का और जुर्माना ठोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक दादा पर्ची बंद नहीं की जाती वह संघर्ष जारी रखेंगे। परंतु इस दौरान कोई भी प्रशासनिक अधिकारी बिंदा सिंह की सार नहीं लेने आया।