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रानी कैकई ने मांगा श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास
दीआजाद हिंद रामलीला सोसायटी के मंच पर शुक्रवार को छठे दिन राम वनवास नाइट का आयोजन किया गया। सोसायटी प्रधान विजय तंवर ने बताया कि राम वनवास नाइट की शुरुआत में राजा दशरथ फैसला करते हैं कि वह राजगद्दी भगवान राम को सौंपेंगे, जिसे कैकई की दासी मंथरा सुन लेती है और रानी कैकई को भड़काते हुए कहती है कि सारा राज तो राम को मिल जाएगा तो उसके भरत को कुछ नहीं मिलेगा।
दासी मंथरा कैकई को याद दिलाती है कि उसने एक युद्ध में दशरथ की सहायता करके जान बचाई थी तब राजा दशरथ ने खुश होकर दो वरदान दिए थे तब आपने कहा था कि समय आने पर उक्त दोनों वरदान मांगूंगी। अब वक्त गया है कि वह वरदान में दशरथ से भरत के लिए राजतिलक और राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांग ले। इस पर कैकई राजा दशरथ अपने दिए हुए दो वचन याद दिलाते हुए कहती है कि वह सच्चा रघुवंशी है तो उसको दिए दोनों वरदान पूरे करे। इस पर राजा दशरथ उसे अपने वरदान मांगने को कहते हैं तो कैकई कहती है कि वह उसे वरदान में भरत का राजतिलक राम को 14 वर्ष का वनवास दे दे।
इस पर राजा दशरथ को बहुत बड़ा धक्का पहुंचता है। वह कैकई को समझाने का प्रयास करते हैं लेकिन कैकई अपनी बातों पर अटल रहती है। राजा दशरथ को मजबूरन कैकई के दोनों वचन पूरे करने पड़ते हैं। इस बीच लक्ष्मण को सारी बात का पता चलता है तो वह भी राम के साथ जाने की जिद करते हैं। शुक्रवार की नाइट में मुख्य मेहमान के तौर पर एमआरएस कालेज के चेयरमैन मनजीत स्वामी, अकाली दल बादल के सचिव रोजी खेड़ा द्वारा भगवान राम की आरती उतारी गई सोसायटी की ओर से मुख्य मेहमानों को सम्मानित भी किया गया।
शुक्रवार नाइट में दशरथ का रोल ओमप्रकाश शास्त्री, कैकई का रोल रमेश खत्री, मंथरा का रोल रमन तंवर, कौशल्या का रोल सतनाम, राम का रोल विजय तंवर, लक्ष्मण का रोल सुरेश तंवर सीता का रोल रवि खत्री ने बड़ी बखूबी से निभाया।
रात 10.30 बजे रामलीला का मंचन करते कलाकार।
शुक्रवार रात अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते आयोजक।