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नामांकन के बाद प्रत्यािशयों ने शुरू किया प्रचार अभियान
नामांकनदाखिल करने के बाद सभी प्रत्याशियों ने जोरों-शोरों से प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। प्रत्याशियों द्वारा हर वार्ड में बैनर ज्ञापन बांटकर बधाई संदेश विकास के लंबे-चौड़े वादे दावे किए जा रहे हैं।
बेशक बोर्ड का चुनाव राजनीतिक पार्टियों के सिंबल पर नहीं होता, लेकिन राजनेताओं द्वारा अपने समर्थकों को चुनावी मैदान में उतारने के बाद यह चुनाव किसी राजनीतिक अखाड़े से कम नहीं है।
अकाली-भाजपा-कांग्रेस तीनों पार्टियों के आमने-सामने होने से सभी प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर हो गई है। अपने समर्थकों को जीताना हर नेता की इज्जत का सवाल बन चुका है।
भाजपा की तरफ से वार्ड नंबर 2, 3, 4, 6 8 में सिर्फ पांच प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है तो कांग्रेस ने वार्ड नंबर 1 को छोड़ सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
जबकि अकाली दल ने प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर क्षेत्र के आठों वार्डों पर कब्जा जमाने की चाह से उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
कांग्रेसी विधायक परमिन्द्र सिंह पिंकी अकाली विधायक जोगिन्द्र सिंह स्थानीय निवासी होने के कारण इनकी लोगों पर ज्यादा पकड़ हैं तो भाजपा ने पहली बार पांच वार्डोंं में प्रत्याशी उतारे है।
भाजपा जमीन से जुड़े पार्टी वर्करों को समर्थन देने में नाकाम रही है, जबकि सहयोग अकाली दल के वर्करों को समर्थन दिया है और तीन वार्डों में प्रत्याशी ना मिलने पर उन तीन वार्डो को अकाली दल के भरोसे छोड़ दिया गया है। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि बोर्ड का चुनाव पूरी तरह से राजनीतिक हस्ताक्षेप का शिकार हुआ हो।
इससे पहले जितनी भी बार पार्षद चुनाव हुए हैं, कभी भी ऐसा नजारा देखने को नहीं मिला।
केन्द्र में सत्ता पर काबिज भाजपा कैंट में भी अपना आधार बनाना चाहती है।
इससे पहले जितनी भी बार छावनी परिषद के चुनाव हुए है। भाजपा ने शायद ही यहां पर अपना खाता खोला हो, जबकि यहां पर अकाली कांग्रेस का जोर ज्यादा रहता है।
पिछले विस संसदीय चुनावों में कैंट से लीड मिलने के कारण कांग्रेसी पूरा जोर लगा रहे हैं। नेताओं की आपसी टस्सलबाजी में वोटरों में शांति का माहौल है।
प्रत्याशियाें के समर्थकों के अलावा अन्य वोटर किसी का भी पक्ष-विपक्ष लेने की बजाय चुप्पी धारे बैठे हैं। लेकिन वह प्रत्यािशयांे को आस दे रहे हैं।