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तत्कालीन सीईओ रजिस्ट्रार भी आएंगे जांच के घेरे में

6 वर्ष पहले
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माननीयहाईकोर्ट द्वारा छावनी की 1970 के बाद हुई रजिस्ट्रियां रद्द करने के फैसले में कैंटोनमेंट बोर्ड के निवर्तकालीन कार्यसाधक अधिकारियों रजिस्ट्रार भी जांच घेरे में आएंगे। भूमि की खरीद-फरोख्त सम्बंधी डाली गई याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सीबीआई से प्राप्त दस्तावेजों के बाद उन अधिकारियों को भी दोषी माना है जिनके समय में भूमि की रजिस्ट्रियां हुई थी। क्योंकि लंबे समय से पूरा खेल अधिकारियों की आपसी सहमति से ही चल रहा था। बोर्ड के पूर्व अधिकारियों पर गिरने वाली गाज से फिरोजपुर बोर्ड ऑफिस में कार्यरत अधिकारी सावधान हो गए हैं और कोर्ट के आदेशो की पूर्णत: पालना करवाई जा रही है। बोर्ड प्रशासन द्वारा लोगों पर बोर्ड द्वारा कोर्ट केस फाईल किए हैं उनके चेहरों पर चिंता के शिकन दिख रहे हैं। हाईकोर्ट द्वारा पहले से ही क्षेत्र की रजिस्ट्रियों पर पाबंदी लगा रखी है, जिस कारण लोगों को अपने मकान-दुकान खरीदने-बेचने में काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। छावनी परिषद के कानून मुताबिक यहां गवर्नर जरनल लैंड 1836 लागू होने के कारण यहां के लोग सिर्फ सुपरस्ट्रक्चर के मालिक है, लेकिन भूमि का मालिक रक्षा मंत्रालय है। भवनों के निर्माण पर भी पूर्ण तौर पर पाबंदी लगी हुई है। जिसके बावजूद क्षेत्र में रसूखदार लोग बोर्ड अधिकारियों की मिलीभगत से अंडर ग्राऊंड चार-चार मंजिल के भवन बना रहे हैं। बोर्ड के ज्यादातर नियम शरीफ इमानदार लोगों पर लागू होते हैं।

छावनी बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष ग्रामीण अकाली विधायक जोगिन्द्र सिंह बताते हैं कि लोगों को बोर्ड के काले कानूनों के घेरे से बचाने के लिए वह सदा आवाज बुलंद करते रहते हैं और सांसद शेर सिंह घुबाया मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी अवगत करवाते रहते हैं। जबकि बोर्ड की नवनिर्वाचित सदस्य रीना माेंगा ने कहा कि छावनी के लोगो के साथ धक्का बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोग जब वॉटर टैक्स, हाऊस टैक्स सभी तरह के कर अदा करते है तो उनकी रजिस्ट्रीया कैंसिल करना गल्त बात है और अगर भूख हडताल और अनशन करना पड़े तो वह तैयार रहेगी।