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आवारा पशुओं से लोग परेशान, प्रशासन नहीं दे रहा है ध्यान

6 वर्ष पहले
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नगरमें आवारा पशुओं का आतंक बढ़ता ही जा रहा है, जिसे रोकने में प्रशासनिक दावे नाकाम साबित हो रहे हैं। शहर-छावनी की सड़कों पर गाय और नंदी घूमते अक्सर मिल जाएंगे और रात के समय तो पशु झुंड बना चौक-चौराहों, सब्जी मंडियों में डेरा जमा लेते हैं। लोगों की परेशानी को समझते हुए डीसी डीपीएस खरबंदा ने सभी पशुआें को रजीवाला गोशाला में भेजने के निर्देश दिए गए थे और पशु पालकों को भी चेतावनी दी थी कि वह अपने पशु खुले ना छोड़े काफी दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासनिक आदेशों पर फूल चढ़ते नजर नहीं रहे है। बेशक सिटी में कुछ गायों को पकड़ गोशाला भिजवाया गया है। लेकिन कैंट में कोई भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा।

कांजी हाऊस में बंद करेंगे आवारा पशुओं को

बोर्डके सैनेटरी सुपरिटेंडेंट योगेश कुमार ने बताया कि बोर्ड द्वारा राम बाग रोड़ पर कांजी हाऊस का निर्माण हो रहा है। उन्हें प्रशासन से मवेशियाें पकड़ने के आदेश नहीं मिले है।

प्रशासन करवाए चारे का इंतजाम

गोपालगोशाला के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि अगर प्रशासन गोपाल गोशाला में गाय रखवाना चाहता है तो वह गोशाला में रखने को तैयार है चाहे वह दूध देने वाली हो या फिर बिना दूध वाली।

^गोवंश की दुर्दशा होना चिंता का विषय है और सरकार को भी इस तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए। जख्मी गायों का उपचार जहां युवाओं द्वारा गठित संस्थाएं कर रही है। सरकार का फर्ज है कि गायों के लिए फंड जारी कर 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माने जाने वाली गाय को उचित सम्मान दें। विपिनकुमार, समाजसेवक

^कैंट बोर्ड द्वारा भी आवारा पशुओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता। बोर्ड प्रशासन पशुओं को पकड़ने के बाद जुर्माना लेकर छोड़ देता है। बोर्ड पूरा अभियान रेवेन्यू बढ़ाने के लिए चलाता है। मनीषशर्मा, दुकानदार

^प्रशासनिक आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। आवारा पशु ट्रैफिक दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं और लोगों को जान-माल की हानि भी होती है। पशुओं को गोशालाओं में शरण देनी चाहिए। रिंकूशर्मा, हीरा वेलफेयर सोसायटी

^सड़कों पर घूम रही गायों नंदियों को गोशालाओं में भिजवाना चाहिए। गोशाला प्रबंधकों का फर्ज है कि मवेशियों को स्थान दें। कुछ प्रबंधक दुधारू पशुओं को ही रखने में तरजीह देते हैं। अश्विनीगोरा, प्रयास वेलफेयर सोसायटी

दूध दोहने के बाद खुला छोड़ दिया जाता है गोवंश को।