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गोपाल गोशाला में महामारी फैलने की आशंका

7 वर्ष पहले
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छावनीकी गोपाल गोेशाला में पिछले लंबे समय से सफाई व्यवस्था ना होने के चलते महामारी फैल गई है। जिसके चलते एक नंदी की गोशाला में दलदल में गिरकर मौत हो गई है। गोपाल गोेशाला गायों की देखरेख को लेकर लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन बुधवार को भास्कर ने जब लोगों के अनेक फोन आने पर गोेेशाला का दौरा किया रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य सामने आए। बता दें कि पिछले तीन दिन से मृत नंदी बुरी तरह गल चुका था और उसके पास खड़े होना मुश्किल था। लेेेकिन उसे अभी तक वहां से बाहर नहीं निकाला गया। हालात यह हैं कि भयंकर बदबू एवं गंदगी के चलते अनेक गाय बीमारी की चपेट में सकती हैं। खैर कुछ भी हो वहां पर सेवा संभाल करने वाले लोगों के अंदर मैनेजमेंट की इतनी दहशत है कि वह कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए। लेकिन एक सज्जन ने अपना नाम प्रकाशित ना करने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश के दौरान तमाम शेेड से पानी टपक रहा है। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। मरे हुए नंदी को उठाने को कोई तैयार नहीं है। बेशक तूड़ी और हरे चारे का उचित प्रबंध है, लेकिन दलदल के कारण कोई भी आदमी गायों को चारा डाल ही नहीं सकता जिसके चलते गायों की उचित सेवा नहीं हो रही।

मरम्मतकी बजाय नई इमारत बनाने पर जोर

गोपालगोेशाला में 350 गाय रखने की क्षमता है। गोवंश के ऊपर सीमेंट की चादर वाली छत डाल रखी है। बारिश के दिनों में सभी गाय पानी से बचती हुई नजर आती है और उनके कमरों में पानी भर जाता है और गोबर मेें पानी मिलने से वह दलदल का रूप धारण कर लेता है और अनेकों तरह के मच्छर पनपने लगते हैं। जिससे अनेकों तरह की बीमारियां गोवंश को घेर लेती है।

दोडॉक्टर करते हैं 175 गायों का उपचार

गोेशालामें करीब 175 गाय है। जिनकी मरहम पट्टी के लिए एक डॉक्टर सरकारी तौर पर तो एक प्राइवेट डॉक्टर की सुविधा है। सरकारी डॉक्टर तो निश्चित दिन गायों की जांच कर चला जाता है, लेकिन इसके अलावा जब भी कोई गाय बीमार होती है तो गोेेशाला के मैनेजर द्वारा डॉक्टर को फोन पर सूचित कर दिया जाता है। भास्कर टीम के दौरे के दौरान पाया गया कि कीचड़ में रहने के कारण अनेकों गायों के पैरों में अब कीड़े भी पड़ चुके हैं।

गोेशालामें रखे गए हैं दो मैनेजर

स्टॉफकी बात करे तो पूरी गोेशाला में गायों की सेवा के लिए कुल 13 कर्मचारी हैं। जिनमें से दो मैनेजर, तीन दूध दोहने वाले और बाकि स