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-जनिंद्र गोयल जुगनू, व्यापारी नेता

6 वर्ष पहले
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सुनीर माेंगा, अध्यक्ष, सिटीजन फोरम

शहर में विकास किया है तो दिखाई क्यों नहीं देता

करोड़ों के विकास कार्य कराए

दविन्द्र कपूर अश्विनी ग्रोवर, पूर्व नगर कौंसिल अध्यक्षों का दावा

राजेश कोछड़,

होलसेल ट्रेडर

प्रवीण मल्होत्रा,

समाजसेवक

चुनावों के दौरान राजनेता कितने भी दावे कर ले, लेकिन जमीनी स्तर से जुड़ी जनता सब कुछ जानती है। नई बनी सड़कें टूटने की कगार पर है तो ट्रैफिक के बुरे हाल लोगो के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। फिरोजपुर का विकास किसी को दिखाई नहीं देता। क्योंकि सांय होते ही शहर अंधकार में डूब जाता है। लेकिन सीवरेज व्यवस्था पहले से कुछ सुचारू तरीके से चल पड़ी है।

किसी भी राजनैतिक पार्टी के नेता चाहे विकास कार्यों के लिए ग्रांट लेकर आने के दावे करते हैं लेकिन कोई यह बताने की स्थिति में है कि यह पैसा कहां से आया। वास्तव में यह पैसा लोगों द्वारा दिए गए करों का है जो सुविधाओं के रूप में पब्लिक को जारी होता है। इस पैसे को लेकर आने की डुगडुगी तो हर कोई बजाने को तैयार है लेकिन पैसों से हुए काम की तरफ कोई ध्यान नहीं देता। यह ठीक है कि करोड़ों की लागत से माल रोड बनी, लेकिन उसकी मैंटेनेंस किस ने की, वहां गड्ढे पड़ चुके हैं, कोई गड्ढे भरने के लिए आग नहीं रहा, उल्टा एनजीओ ने यह बीड़ा उठाया है। सीवरेज के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपए जारी होने के ढोल पीटे जाते हैं, इतना पैसा उचित योजना बनाकर लगाया जाए तो पूरे शहर में नया सीवरेज सिस्टम डाला जा सकता है। समस्याओं का स्थाई हल होना चाहिए, ग्रांटों की बंदरबांट नहीं।

पूर्व नगर कौंसिल अध्यक्ष दविन्द्र कपूर का कहना है कि मैंने अपने कार्यकाल (अप्रैल 2010 से नवम्बर2012 तक) के दौरान शेरशावाली चौंक से लेकर सर्कुलर रोड़ 9.99 करोड़ की लागत से बनवाई है और दो पानी की टंकियों 6 नए वॉटर पंपों का निर्माण करवाया है। छह करोड़ की लागत से गलियों सड़कों का निर्माण करवाया है। इसी तरह पूर्व नगर कौंसिल अध्यक्ष अश्विनी ग्रोवर ने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल (नवम्बर 2012 से जून 2014 तक) 8 करोड़ की लागत से पूरे नगर में स्ट्रीट लाईट लगवाईं। सौ फिसदी सीवरेज के लिए 57 लाख की लागत से काम शुरू हुआ। सीवरेज ट्रीटमैंट प्लॉट का प्रपोजल पास हो चुका है। 82 लाख से सीवरेज की सिल्ट निकालने का प्रोजेक्ट शुरू करवाया।

विकास के ढोल-जनता खोलती पोल

अगर हर कोई विकास के ढोल पीट रहा है तो फिर यह बताने की स्थिति में क्यों नहीं है कि नगर के जिन क्षेत्रों में आज तक सीवरेज समस्या विकराल बनी हुई है, वहां के लिए क्या ग्रांट नहीं आई। सौ फीसदी सीवरेज डाला जा चुका है तो बारिशों के दिनों में नगर जलथल क्यों हो जाता है। सीवरेज ट्रीटमैंट प्लॉट की मोटरें खराब क्यों होती हैं। निचले इलाकों में आज तक सीवरेज निकासी का कोई हल नहीं निकाला जा सका, विकास तो दूर की बात है।

नगर में सीवरेज व्यवस्था के बुरे हाल है और गंदगी के कारण शहरियों का जीना दुभर हुआ हो गया है। पार्षदों ने जनता की सुनने की बजाय आपसी राजनीति ही की है। शहर में चारों आेर अवैध कब्जे हुए पड़े है। शहर में पानी का भी बुरा हाल है लोगों के घरों में पीने के लिए साफ पानी भी नहीं आता। सत्ताधारी पार्टियों ने सिर्फ दावे ही किए है। दावों को पूरा करने में किसी ने जहमत मोल नहीं ली।