सत्ता के लिए काउंटडाउन
हाईकोर्ट की फटकार के बाद पंजाब सरकार की ओर से निकाय चुनाव की तारीखें घोषित करते ही राजनैतिक खेमों में सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। गौरतलब है कि पिछले नगर काउंसिल चुनाव जून 2008 में हुए थे और इतने लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे चुनावों को लेकर जहां विभिन्न राजनैतिक पार्टियों में विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है वहीं जनता दरबार में भी विभिन्न क्यास लगाए जा रहे हैं। 2008 में राज्य में राजनैतिक पार्टियों की हालत और मौजूदा हालात में जमीन आसमान का अंतर चुका है।
सत्ताधारी पार्टी शिरोमणि अकाली दल बादल से अलग होकर नई पार्टी पीपीपी बनाने वाले मनप्रीत बादल सक्रिय राजनीति से परे हो चुके हैं, वहीं वर्ष 2013 में दिल्ली विस चुनाव में चमत्कार दिखा चुकी आम आदमी पार्टी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है और पंजाब की चार सीटों पर कब्जा जमाया। उधर, 2007 के विस चुनाव से सत्ता से विमुख हुई कांग्रेस पार्टी की हालत भी कोई बेहत्तर नजर नहीं रही और पार्टी के प्रान्तीय शीर्ष नेतृत्व से लेकर निम्न स्तर तक फूट समय समय पर उजागर होती रही है।
लोस चुनाव 2014 में केन्द्र की सत्ता से भी कांग्रेस विमुख हो चुकी है, जिसका असर निकाय चुनावों में साफ देखने को मिल सकता है। फिलहाल राजनैतिक पार्टियों का समीकरण जो भी हो, लेकिन फिरोजपुर सिटी नगर काउंसिल चुनावों पर हर किसी की नजर टिकी हुई है।
सत्ता में भागीदार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा यहीं के रहने वाले हैं और उनके साथ साथ पार्टी की पूरी कोशिश होगी कि फिरोजपुर सिटी नगर काउंसिल की सभी सीटों पर गठबंधन का परचम लहराया जाए। इसके लिए भाजपा एवं इसके अधीनस्थ गठित सेल पिछले तीन महीने से सदस्यता अभियान में अपनी ताकत झोंक रहे हैं। उधर, प्रतिकूल परिस्थितयों में अड़िग शख्सियत के रूप में जाने जाते कांग्रेस विधायक परमिन्द्र सिंह पिंकी नगर काउंसिल फिरोजपुर सिटी पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। वर्ष 2008 में टिकटों के आबंटन में हुई भारी चूक को कांग्रेस दोबारा नहीं दोहराना चाहती और प्रत्येक वार्ड में वर्करों को लामबंद करने पर जुटी हुई है। आम आदमी पार्टी की ओर से भी प्रत्येक वार्ड में गुप्त सुगबुगाहट जारी है।
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