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नवरात्रों में लहसुन, प्याज के परहेज हो तो होती है मां की कृपा: राधेश्याम

7 वर्ष पहले
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नवरात्रोंको लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार नवरात्रे नौ नहीं बल्कि आठ रहे है, जबकि नौवे दिन दशहरे का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। नवरात्रों का घटना और श्राद्ध का बढ़ना अच्छा नहीं माना जाता। लेकिन फिर भी पंचांग के अनुसार कोई पंडित अष्टमी नवमी को एक दिन बता रहा है तो कोई नवमी दशमी को। लेकिन माता के भक्तों को यह चिंता सताए जा रही है कि वह नौ की बजाय आठ नवरात्रे किस तरह मनाए। श्री शीतला देवी मंदिर के पंडित राधेश्याम पांडे ने कहा कि नवरात्रे ना तो घटे है और ना ही बढ़े। केवल कुछ समय के हेरफेर के कारण लोगों में अफवाह का माहौल है। उन्होंने कहा कि अष्टमी अपने सही समय पर 2 अक्टूबर को है तो नवमी 3 अक्टूबर को। भारतीय परंपरा के अनुसार दशहरे का पर्व हमेशा दशमी को आता है और इस पर्व को संध्याकाल में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वास्तव में नवरात्रा बुधवार बाद दोपहर से शुरू हो जाएगा। लेकिन परंपरा अनुसार स्वच्छ मुंह से ही घट स्थापना होती है तो लोग वीरवार को नवरात्रे की स्थापना करे और एकम प्रतिपदा वीरवार को मात्र दोपहर 1 बजे तक ही है। उन्होंने कहा कि 3 अक्टूबर को नवमी सुबह 10 बजे खत्म होगी फिर दशहरा शुरू हो जाएगा।

माता के भक्त इस बात से काफी चिंतित है कि अष्टमी नवमी एक साथ मनाएं या फिर नवमी-दशमी। क्योंकि पिछले लंबे समय से नवरात्रों के घटने-बढ़ने का क्रम निरंतर जारी है। जिस कारण श्रद्धाल चिंता में डूब जाते है और उन्हें यह समझ नहीं आती कि कौन का पर्व किस दिन मनाया जाए।

नवरात्रों का यह है शुभ मुहूर्त

पंडितराधेश्याम पांडे ने बताया कि वीरवार से आरंभ होने वाले नवरात्रों में मां के भक्तों को चाहिए कि वह माता की मिट्टी की मूर्ति की ही पूजा करे क्योंकि मिट्टी की मूर्ति शुद्ध होती है। उन्होंने कहा कि नवरात्रों में लहसुन, प्यास, शराब के अलावा अनाज का परहेज किया जाएं तो बेहतर होता है और घर में सुख-शांति के साथ मां की अनुकंपा बनी रहती है। उन्होंने बताया कि 1 अक्टूबर को अष्टमी सुबह 10:10 बजे शुरू होगी जो 2 अक्टूबर को 8:37 तक जारी रहेगी।