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शीतला देवी मंदिर में अखंड ज्योति के मात्र दर्शन करने से ही कटते हैं कष्ट
करीबडेढ़ शतक पुराना सिद्धपीठ श्री शीतला देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का गढ़ बन चुका है।
पहले यहां पर मां शीतला की छोटी प्रतिमा नीम के वृक्ष के नीचे विराजमान थी और श्रद्धालु यहीं पर आकर बसौड़ा पूजन किया करते थे, लेकिन समय के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आस्था मां शीतला के मां शीतला चर्म रोग से छुटकारा दिलवाने की देवी मानी जाती है जिस कारण श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर में दर्शनों के लिए आते हैं। नवरात्र में पूरे मन्दिर प्रांगण को लाइटों से सजाया जाता है।
मंदिर में माता की खेतरी बीजने के अलावा घट स्थापना भी की जाती है। सुबह माता का 16 श्रंगार करने के बाद उन्हें फल आहार का भोग लगाया जाता है और प्रशाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। मंदिर पुजारी राधेश्याम अनुसार शाम के समय महाआरती की जाती है और सैंकड़ाें श्रद्धालु मां का गुणगान करते हैं। देश के कई प्रमुख संतों द्वारा इस मंदिर को सिद्धपीठ का दर्जा भी दिया जा चुका है और यहां पर प्रतिवर्ष महान संतों का आगमन होता है और कथाएं चलती है।
मंदिर की 75 फीट ऊंची गुंबद यहां के आकर्षण का केन्द्र है और यहां पर ज्वाला जी से लाई गई मां की पवित्र अखंड ज्योति निरंतर प्रचंड रहती है। मान्यता है कि ज्योति का घी मात्र लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं।
मंदिर में निरंतर जलती है ज्योति।
मंदिर में सुशोभित मां दुर्गा की भव्य मूर्ति।