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पत्नी की डिलीवरी हो रही थी अौर मैं लक्ष्मण का अभिनय कर रहा था
28साल पहले प|ी की डिलीवरी हो रही थी कि मैं रामलीला की स्टेज पर लक्ष्मण का रोल अदा कर रहा था। रामलीला में अभिनय करने का फितूर मेरे दिमाग में बाल्यकाल से ही चढ़ा था और रोल के दिनों में भगवान ने भी मेरी कई बार परीक्षाएं भी ली।
लेकिन मैने हार ना मानी और आज मैं रामलीला के डायरेक्टर पद पर आसीन हूं। यह बात सनातन धर्म दशहरा कमेटी के रामलीला डायरेक्टर लाजपत गर्ग ने भास्कर के साथ बातचीत के दौरान कही।
गर्ग ने बताया कि बचपन में उनके पिता प्यारेलाल उसे रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। 16 वर्ष की उम्र में उसने पहली बार रामलीला की स्टेज राजा हरीशचन्द्र के ड्रामे में रोहित का रोल किया था और उसके अभिनय को सभी ने काफी सराहा था।
उसके बाद मैं रामलीला में रोल करने लगा। रामलीला के दिन आते ही मैं भूख-प्यास भूल जाता था और रामलीला को बेहतर तरीके से करने कलाकारों को प्रैक्टिस करवाने की तैयारियां शुरू कर देता हूं। लाजपत बताते हैं कि वर्तमान में उसकी 56 वर्ष उम्र हो चुकी है और अब तक वह राम, लक्ष्मण, सीता, दशरथ, राजा हरीशचन्द्र, नारद इत्यादि के रोल कर चुके हैं। पिछले पांच वर्ष से डायरेक्टर की भूमिका भी निभा रहा है। रामलीला से दो माह पहले तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है और सभी कलाकारों को गीतों की प्रैक्टिस करवाई जाती है। उन्होंने बताया कि 20 वर्ष तक बैंक में भी नौकरी की है, लेकिन फिर भी उसने रामलीला में रोल करना ना छोड़ा। उसकी प|ी
सुमन द्वारा भी उसे पूरा सहयोग दिया जाता है और छोटे बेटे निखिल को भी बाल्यकाल से रामलीला में अभिनय करवाना शुरू कर दिया था। इस समय वह राम की भूमिका निभा रहा है। लाजपत ने बताया कि रामलीला ही व्यक्ति को संस्कारित करती है। क्याेंकि इससे त्याग, माता-पिता की आज्ञा मानना, अहंकार छोड़ने का संदेश मिलता है। उन्होनें कहा कि अब भी उनकी रामलीला में कलाकारो में जोश और उत्साह होता है।
बातचीत के दौरान लाजपत गर्ग