निगम अस्पताल के नाम से मशहूर थी इमारत
क्रांतिकारियोंकी गतिविधि केन्द्र रही तूड़ी बाजार स्थित इमारत, जिसके बारे में प्रचलित है कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह यहां बम बनाया करते थे। वास्तव में यह इमारत डाॅ निगम अस्पताल के नाम से मशहूर थी। यह दावा है शहीद ऊधम सिंह की जीवनी पर पुस्तक लिख चुके इंजीनियर राकेश कुमार का।
उन्होंने कहा कि पता नहीं क्यों और किसने इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की और इस इमारत को क्रांतिकारियों की बम बनाने की फैक्ट्री की संज्ञा दे डाली, जबकि यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों द्वारा लाहौर से दिल्ली के मध्य विश्राम के रूप में प्रयोग होती थी। भास्कर ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की गतिविधियों का केन्द्र रही तूड़ी बाजार स्थित इमारत को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग को प्रमुखता से प्रकाशित करने पर प्रतिक्रिया देते हुए लेखक राकेश कुमार ने कहा कि इस इमारत के प्रति समय-समय की सरकारों ने बेरुखी का रवैया ही अख्तियार किया है। भगत सिंह एवं क्रांतिकारी साथियों के जीवन से सम्बन्धित कई किताबों का अध्ययन कर चुके राकेश ने बताया यह इमारत डाॅ निगम अस्पताल के नाम से मशहूर थी और इसे 10 अगस्त 1928 से लेकर 4 फरवरी 1929 तक क्रांतिकारियों ने इस्तेमाल किया था।
कौनथे डाॅ निगम
लालालाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह एवं उनके साथियों ने क्रांतिकारी पार्टी बनाई। इस पार्टी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में गुप्त ठिकाने बनाए थे। इन्हीं में तूड़ी बाजार की यह इमारत एक अहम ठिकाना थी जिसे क्रांतिकारी पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान) एवं देश के अन्य हिस्सों में आवागमन करने वाले क्रांतिकारियों के विश्राम स्थल के रूप में उपयोग करते थे। देश के विभिन्न भागों से क्रांतिकारी पंजाब मेल गाड़ी से फिरोजपुर आते थे जिसके पश्चात आगे सफर के लिए रवाना होते थे। डाॅ. गया प्रसाद की ड्यूटी क्रांतिकारियों को बम बनाने का सामान देने की लगाई गई और इसीलिए गया ने अपना नाम बदल कर डाॅ. बीएस निगम रख लिया।
डाॅ निगम के नाम पर यह इमारत किराए पर ली गई जहां नीचे अस्पताल बनाया गया और ऊपर क्रांतिकारियों का आवास। इमारत के बाहर निगम फार्मेसी एवं ड्रगिस्ट का बोर्ड लगा होता था। गया प्रसाद देशभक्तों को बम बनाने का सामान देते थे। 4 फरवरी 1929 को डाॅ निगम इस दुकान में पड़ीं मेज कुर्सियां एवं दवाइयां 25 रुपए में पड़ोसी डाॅ दीवान सिंह को बेच कर