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महाराजा नाभा के समय में शुरू हुआ था रामलीला मंचन
आतंकवाद के दौर में भी रामलीला मंचन होता था
इकबालदीप संधू | मंडी गोबिंदगढ़
महाराजानाभाके समय से यहां चौधरी जगन्नाथ ड्रामेटिक क्लब द्वारा शुरू की रामलीला मंचन आज भी जारी है। पुराने कलाकारों में ठाकुर सिंह, धर्मदेव सगड़, दर्शल भाटिया और पवन शारदा का नाम आज भी लोग अदब से लेते हैं। महावीर दल ने उसके बाद रामलीला मंचन शुरू की। 1978 में श्री रामकला मंच ने श्री रामलीला मंचन शुरू की। मंच की ओर से रामलीला मंचन आज भी जारी है। पहले 15 दिनों तक रामलीला का मंचन होता था लेकिन अब बढ़ती महंगाई के कारण 13 दिनों तक ही हाेता है। 1982 में रामलीला का मंचन सिर्फ 50 हजार रुपए में होता था लेकिन अब 6 लाख रुपए लगते हैं। टीवी और इंटरनेट होने के कारण पांडालों में कम ही भीड़ दिखती है। रामलीला मंचन को बेहतर बनाने के लिए पुराने पर्दों की जगह नई लाइटों की तकनीक ने ले ली है।
अबश्रद्धा कम फर्ज दिखाई देता है
12साल तक लगातार श्री राम का रोल निभा चुके और 1981 से श्री रामलीला मंचन से जुड़े कलाकार सुरिंदर शर्मा ने कहा कि पहले जब वो रोल करते थे तो दर्शकों से इतना प्यार मिलता था कि लोग श्रद्धा से उन्हें पैसे चढ़ाते और आशीर्वाद लेते थे। मंचन पूरा होने पर उन्हें हरिद्वार भेजा जाता था। ताकि रोल के दौरान जो उन्होंने श्री राम का भेष धारण कर लोगों से पैर को हाथ लगवाए थे उसकी माफी मिल सके। अब सिस्टम बदल गया है। अब लोग अगर चंदा भी देते हैं तो उसमें श्रद्धा कम और फर्ज ज्यादा दिखाई देता है।
महंगाईके कारण प्राइवेट जॉब कर रहे कलाकार
25सालों तक भरत, विश्वामित्र और विभिन्न रोल निभा चुके विनोद शर्मा ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि उस दौरान हम दोराहा से लकड़ी लाकर खुद स्टेज बनाते थे। शहर से ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों से लोग ट्रॉलियों से मंडी गोबिंदगढ़ रामलीला देखने पहुंचते थे। यही नहीं तबके कलाकार सारे काम छोड़ कर उन दिनों सिर्फ रामलीला के काम में ज्यादा समय देते थे, लेकिन अब महंगाई के इस दौर में कलाकार प्राइवेट जॉब कर रहे हैं।
दोपार्ट में बंट गया था श्री राम कला मंच : कलाकारोंके साथ शहर के लोगाें को उस समय गहरा धक्का लगा था जब श्री राम कला मंच के कलाकार 2002 में आपस में बंट गए थे, जिसमें एक ग्रुप ने श्री रामलीला कमेटी अलग बना कर शहर के दूसरे हिस्से पहले गोपाल मार्केट और अब आर्य स्कूल मे