- Hindi News
- इंडस्ट्री को रॉ मटीरियल की आपूर्ति पहले की अपेक्षा रह गई है आधी, प्रोडक्शन का ग्राफ नीचे गिरा
इंडस्ट्री को रॉ मटीरियल की आपूर्ति पहले की अपेक्षा रह गई है आधी, प्रोडक्शन का ग्राफ नीचे गिरा
राजीव सूद
कारोबारी मोहन गुप्ता ने कहा कि पिछले एक महीने में कच्चे माल के रेटों में 5 सौ से एक हजार रुपए प्रति टन तक उतार-चढ़ाव रहा। जो अभी जारी है। कारोबारी कपिल सिंगला कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर और रुपए की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव ने भी कच्चे माल की कीमतों को प्रभावित किया है। मिडिल ईस्ट देशों के खराब हालात और मुद्रा स्फीति की दरों ने इंपोर्टेड रॉ मटीरियल की आपूर्ति को बाधित किया है। फिलहाल यहां की इंडस्ट्री को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से कच्चा माल मिल रहा है। रोलिंग मिल एसोसिएशन के प्रधान राजीव सूद के मुताबिक इंडस्ट्री को जरूरत के मुताबिक रॉ मटीरियल नहीं मिल पा रहा। इंडस्ट्री को कच्चा माल मिल पाने के कारण प्रोडक्शन में पचास फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार इस ओर ध्यान दे।
इंपोर्ट होने वाला रॉ मैटीरियल ज्यादातर मिडिल ईस्ट के देशों से आता है
लोहा नगरी पर कच्चे माल का संकट
नवनीत छिब्बर/इकबाल दीप संधू | मंडी गोबिंदगढ़
आतंकीसंगठनआईएसआईएस की इराक में कारगुजारियों का प्रभाव औद्योगिक नगरी पर भी दिखने लगा है। लोहा नगरी में मंदी और बंदी की मार झेल रही इंडस्ट्री को रॉ मटीरियल की आपूर्ति पहले की अपेक्षा आधी रह गई है। प्रोडक्शन का ग्राफ लगातार गिर रहा है। प्रोडक्शन कॉस्ट और तैयार माल के रेट में गैप घटने से कारोबारियों की कमर टूट चुकी है। अगस्त से यहां इंपोर्ट होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही। जिस कारण प्रोडक्शन भी आधी रह गई है। हालात यह है कि रोलिंग मिलें हफ्ते में तीन से चार दिन ही चल रही हैं।
दो साल में लोहा नगरी की करीब 50 फीसदी औद्योगिक इकाइयों में तालाबंदी हो चुकी है। ऐसे में कच्चे माल का इंपोर्ट बाधित होने से इंडस्ट्री को परेशानी हो रही है। गोबिंदगढ़ की इंडस्ट्री को कच्चे माल की आपूर्ति गुजरात के भावनगर और दक्षिण भारत के राज्यों से होती थी। गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों ने कारोबारियों को आकर्षक योजनाएं और बेहतर सुविधा दे कर अपनी ओर आकर्षित किया। उन क्षेत्रों में इंडस्ट्री तेजी से बढ़ी और कच्चे माल की खपत वहीं होने लगी। लिहाजा लोहा नगरी को लोकल और इंपोर्टेड रॉ मटीरियल पर निर्भर होना पड़ा। इंपोर्ट होने वाला रॉ मैटीरियल ज्यादातर मिडिल ईस्ट के देशों से आता है। जहां पिछले कुछ समय से हालात ठीक