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खेती में नई तकनीकें अपनाकर किसान बढ़ाएं अपनी आमदन
किसानोंकोबेहतर खेती सेवाएं देने के उद्देश्य से खेतीबाड़ी दफ्तर में कीट नाशक और बीज विक्रेताओं को अवेयर करने के लिए कैंप लगाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चीफ एग्रीकल्चर अफसर डाॅ. लखविंदर सिंह हुंदल कर रहे थे। डाॅ. रामेश कुमार शर्मा खेतीबाड़ी अफसर पीपी, डाॅ. अमरीक सिंह एडीओ, डाॅ. रणधीर सिंह एडीओ पीपी, डाॅ. सर्बजीत सिंह औलख सहायक प्रोफेसर कृषि विज्ञान केंद्र और भारी संख्या में डीलर मौजूद थे। डाॅ. हुंदल ने कहा जिले की आर्थिकता मुख्य तौर पर खेतीबाड़ी पर निर्भर करती है। इसलिए किसानों की प्रति परिवार आमदन बढ़ेगी तो यहां के कारोबारियों की भी आमदन बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि खासकर छोटे किसानों की आर्थिकता को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि उन तक खेती की नई तकनीकें पहुंचाई जाएं। इससे छोटे किसान भी नई समय के साथ-साथ चल सकें। उन्होंने कहा कि जिले में तकरीबन 800 खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता हैं जिनमें ज्यादातर कीड़े, बीमारियां और अन्य समस्याओं से नावाकिफ है जिस के कारण सही अगुवाई मिलने से कई बार किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस सिखलाई कैंप को शुरू करने का उद्देश्य कीट नाशक विक्रेताओं को फसलों की समस्याएं, एक्ट और रिकार्ड कीपिंग के बारे में बुनियादी जानकारी देना है ताकि किसानों को इन डीलरों से सही और योग्य अगुवाई मिल सके। मौजूदा समय में किसानों की आर्थिक हालत तभी सुधारी जा सकती है यदि डीलर और किसान एकसाथ आधुनिक खेती तकनीकें किसानों तक पहुंचाने में सहायक हों। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 10 दिन तक चलेगा, जिसमें हरेक दिन एक एक ब्लाक से 30 डीलर भाग लेंगे। डाॅ. रामेश शर्मा ने बीज, खाद और कीटनाशक एक्ट, डाॅ. अमरीक सिंह ने खरीफ की फसलों की मुख्य समस्याओं, उनकी पहचान और रोकथाम, डाॅ. सर्बजीत सिंह औलख ने खरीफ की फसलों के कीड़े मकौड़ों की पहचान और रोकथाम, डाॅ. रणजीत सिंह रिकार्ड कीपिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सिखलाई कैंप में मौजूद कीटनाशक और बीजों विक्रेता।
चीफ एग्रीकल्चर अफसर डाॅ. लखविंदर सिंह हुंदल और अन्य अधिकारी।