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एडीआईजी से किसान बोले-हमें गोली मार कर लाशों पर लगा लो फेंसिंग
बार्डरपरफेंसिंग के विरोध में वीरवार को बार्डर एरिया संघर्ष कमेटी द्वारा बीएसएफ हेडक्वार्टर के मेन गेट पर दिए धरने के दौरान किसान एडीआईजी से बातचीत में भड़क गए। डीआईजी की गैरमौजूदगी के कारण किसानों से बात करने के लिए एडीआईजी राजीव कपूर, डीसीएमटी अमित कुमार और डीसी कम्युनिकेशन अनिल कुमार गेट पर आए। एडीआईजी ने सुरक्षा के मद्देनजर फेंसिंग की जरूरत के बारे में किसानों को समझाने की कोशिश की तो एक किसान ने तो कह दिया कि वे किसी भी सूरत में गलत जगह पर फेंसिंग नहीं लगने देंगे।
किसान नेता ने कहा कि बीएसएफ अपनी ताकत से जबरदस्ती भी फेंसिंग लगवा सकते है लेकिन पहले उन्हें गोली मारनी होगी फिर लाशों पर खड़े होकर फेंसिंग लगवाना। इस पर एडीआईजी कपूर भी गुस्से में गए और उन्होंने किसानों से कह दिया कि जाओ शोर मचाते रहो। इसके बाद वह साथी अफसरों के साथ वापिस हेडक्वार्टर के गेट से अंदर चले गए। डीसीएमटी अमित कुमार ने स्थिति संभाली और किसानों को समझाने की कोशिश जारी रखी। हालांकि अंदर से एक जवान ने आकर उन्हें कहा कि एडीआईजी बुला रहे हैं लेकिन डीसीएमटी ने जवान की बात को अनसुना कर किसानों को समझाने का प्रयास जारी रखा।
अमित कुमार ने किसानों को समझाया कि इंटरनेशनल कानून के मुताबिक जीरो लाइन से 50-150 मीटर तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। इस लिए हमें कानून के मुताबिक इससे पीछे ही फेंसिंग लगानी होती है। उन्होंने कहा बार्डर पर रावी दरिया के कारण कई जगह पर फेंसिंग को काफी पीछे भी लगाना पड़ता है। केंद्र सरकार की सर्वे कमेटी सर्वे कर जो रिपोर्ट देती है, फेंसिंग उसी हिसाब से लगती है। इस पर किसानों ने यह मुद्दा भी उठाया कि उन्हें फेंसिंग के पार की जमीन पर ऊंचे कद की फसलें बीजने से रोका जाता है। इस पर उन्होंने कहा कि फेंसिंग के पार की जमीन पर सुरक्षा की नजर से बड़े कद की फसल लगाने से रोका जाता है क्योंकि घुसपैठिए या स्मगलर ऐसी फसलों का छिपने के लिए इस्तेमाल कर सकते है। उन्होंने किसानों को समझाया कि वे अपने तीन चार मुख्य नेताओं के नाम उन्हें बता दे और लिखित में मैमोरंडम दें तो वे इस संबंधी डीआईजी से बात करके उन्हें बातचीत के लिए बुलवा लेंगे जरूरत पड़ने पर डीआईजी मौके पर भी जाएंगे, वहां भी किसान नेताओं को बुलवा लिया जाएगा और जरूर समाधान निकाला जाएगा। इस पर किसान मान गए और करीब दो घंटे में ही धरना समाप्त