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8000 हेक्टेयर में मक्की की खेती करना लक्ष्य : डॉ. हुंदल

6 वर्ष पहले
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जिलामें कृषि प्रसार सेवाओं को बेहतर बनाने और रबी के मौसम में की जाने वाली गतिविधियों पर चर्चा के लिए मुख्य खेतीबाड़ी अफसर डाॅ. लखविंदर सिंह हुंदल के नेतृत्व में जागरुकता वर्कशॉप लगाई गई। इस मौके पर डाॅ. रमेश कुमार, डाॅ. परमबीर सिंह, डाॅ. हीरा सिंह, डाॅ. मनप्रीत सिंह, डाॅ. मित्रमान सिंह, डाॅ. कमलजोत कौर आदि मौजूद थे।

कृषि विकास अधिकारी डाॅ. अमरीक सिंह ने फसलों की नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। डाॅ. हुंदल ने कहा कि भू-जल स्तर में गिरावट को मुख्य रखकर जिले में रबी के मौसम में 8000 हेक्टेयर में मक्की की खेती का लक्ष्य रखा गया है। मक्की के मंडीकरण के लिए प्रदेश स्तर पर कुछ निजी कंपनियों के साथ संपर्क कर फसल की खरीद को यकीनी बनाने का फ्रयास किया जाएगा ताकि किसानों को कोई समस्या झेलनी पड़े। धान बासमती की सीधी बुआई को प्रोत्साहित करने का प्रयास होगा ताकि प्राकृतिक स्रोतों को बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि किसानों की ओर से फसलों में संतुलित तौर पर रासायनिक खादों का प्रयोग करने से जहां पानी दूषित हो रहा है, वहीं जमीन की उत्पादकता भी प्रभावित हो रही है। चारे की फसलों में यूरिया के ज्यादा प्रयोग से दूध में इसकी मात्रा बढ़ गई है, जिससे नई बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि रबी के मौसम में धान, मक्की और बासमती की फसल में यूरिया के सही प्रयोग को लेकर प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। कृषि विभाग का मुख्य काम किसानों तक पीएयू की ओर से विकसित नई खेती तकनीकों को पहुंचाना है ताकि फसलों की उत्पादकता बढ़ाई जा सके।