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- स्टेंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट 13 से 15 फरवरी तक लुधियाना, अमृतसर का दौरा करेगी: डॉ. कुमार
स्टेंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट 13 से 15 फरवरी तक लुधियाना, अमृतसर का दौरा करेगी: डॉ. कुमार
प्रदेशके इतिहास में पहली बार स्टेंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट ऑन साइंस एंड टेक्नालोजी, एन्वायरनमेंट एंड फॉरेस्ट लुधियाना और अमृतसर में शहरी विकास को लेकर बैठक करने जा रही है। इसके तहत 13 को लुधियाना और 14 15 को अमृतसर में बैठक की जाएगी।
यह जानकारी कमेटी के चेयरमैन और राज्यसभा सदस्य डाॅ. अश्विनी कुमार ने पत्रकारों के साथ बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि कमेटी में विभिन्न राजनीतिक दलों के 29 सदस्य शामिल हैं। इसके विचाराधीन साइंस, टेक्नाॅलोजी, पर्यावरण, जंगलात, स्पेस एंड टेक्नाॅलोजी जैसे अहम मुद्दे आते हैं। इन्हें लेकर बनने वाले कानूनों का यही कमेटी अनुमोदन करती है। प्रदेश के इन शहरों से ही देश का भविष्य जुड़ा हुआ है, जिसके चलते कमेटी ने इनके दौरे का फैसला किया है। इसके अलावा इन्हें चुनने का एक कारण यहां पर गलत ढंग से हुआ शहरी विकास भी है। दौरे के दौरान कमेटी इन शहरों में विकास, पर्यावरण व्हीकल पॉल्युशन आदि मुद्दों पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के हिसाब से शहरी विकास में कई अहम चुनौतियां रही हैं। वर्तमान में 40 करोड़ आबादी शहरों में रहती है, जो 2035 तक 70 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इस समय इतनी आबादी के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है तो आने वाले समय में इसे कैसे पूरा किया जाएगा। इसीलिए कमेटी ने इस शहरों का चयन किया है। इन शहरों में प्रदूषण का मुख्य कारण ट्रैफिक है।
उन्होंने कहा कि लुधियाना में 10 साल से मेट्रो का सपना संजोया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर अभी तक कोई काम नहीं हो पाया। यहां पर उद्योगों से निकलने वाला कैमिकल पॉल्युशन सबसे बड़ा कारण है। बैठक के दौरान वहां के उद्योगपतियों से बात कर इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान केंद्र सरकार की एन्वायरनमेंटल मिनिस्टरी के अफसरों की टीम भी साथ रहेगी।
अमृतसर में कमेटी के सदस्य श्री दरबार साहिब, श्री दुर्ग्याणा मंदिर, जलियांवाला बाग और अटारी बाॅर्डर भी जाएगी। इस दौरान शहरी विकास के मुद्दों पर एनजीओज से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती पीने के पानी की है। प्रदेश में गिरता भू-जल स्तर काफी चिंताजनक है। इसके चलते कृषि उत्पादन में भी कमी आई है। खादों के ज्यादा इस्तेमाल के कारण भी पानी जहरीला होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर ने प्रदेश से पानी के 1376 सेंपल भरे थे, जिनमें से 70 फीसदी में यूरेनियम पाया गया है। इनसे कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए इन बैठकों में सेंटर के अफसरों को भी बुलाया गया है। इसके अलावा ग्लोबल कमिशन ऑन क्लाइमेट की रिपोर्ट के अनुसार देश में दुनिया भर में सबसे ज्यादा पशु हैं, लेकिन दूध उत्पादन दुनिया भर से आधा भी नहीं है। इसके पीछे बिगड़ता पर्यावरण ही मुख्य कारण है। प्रदूषण के कारण ताजमहल पर भी प्रभाव पड़ रहा है। कमेटी 22 फरवरी को ताजमहल का भी दौरा करेगी।
पत्रकारों के साथ बात करते डाॅ. अश्विनी कुमार।