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काहनूवान छंब में अब सुनाई नहीं देती प्रवासी पक्षियों की सुरिली आवाजें
कभीकाहनूवान छंब मेंसाइबेरिया, चीन और इंग्लैंड के अलावा यूरोपियन प्रवासी पक्षी ठहरा करते थे, लेकिन कुछ साल से अब इनकी चहचहाहट यहां सुनाई नहीं देती। करीब 300 एकड़ में फैले छंब में पहले हर साल दिसंबर माह के अंत और जनवरी की शुरुआत में प्रवासी पक्षी पहुंच जाते थे, जो मार्च तक अपनी कलाबाजियों से सभी को अचंभित करते थे।
जंगली जीवों से खास लगाव रखने वाले प्रिंसिपल अमर सिंह, ठेकेदार बिशन सिंह, प्रो. हरभजन सिंह, कश्मीर सिंह और मास्टर जोगिंदर सिंह ने बताया कि छंब के साथ ग्राम पंचायत चोपड़ा की जमीन लगती थी। इसे पंचायत ने नगर कौंसिल गुरदासपुर को ठेके पर दे रखा है। कौंसिल इसे डंप के तौर पर प्रयोग कर पूरे शहर की गंदगी यहां फेंकती है।
गंदगी की बदबू के कारण प्रवासी पक्षी यहां नहीं ठहरते और उड़कर कहीं ओर चले जाते हैं। जंगली जीव सुरक्षा विभाग के अनुसार यूरोपियन पक्षी केवल चार माह ही भारत में ठहरते हैं। इसके बाद तापमान बढ़ने के कारण ये लौट जाते हैं। गांव चोपड़ा के सरपंच प्रितपाल सिंह बोनी ने बताया कि पंचायत की जमीन दलदल और छंब के कारण कृषि योग्य नहीं है।
पंचायत की आमदन बढ़ाने के लिए इसे नगर कौंसिल गुरदासपुर को पहले 31 मार्च 2015 तक ठेके पर दिया गया था। अब इसे और पांच साल के लिए ठेके पर दे दिया गया है।
छंब की जमीन पर कूड़ा कर्कट उठाते नगर कौंसिल के कर्मी।
नगर कौंसिल गुरदासपुर ने जमीन ठेके पर लेकर बना रखा है डंप