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गेहूं में नदीन को नहीं रोका तो 50 फीसदी कम होगी पैदावार: डाॅ. अमरीक
गेहूंकीफसल में अगर नदीन की समय पर रोकथाम की जाए तो प्रति हेक्टेयर 20-50 फीसदी पैदावार कम हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि नदीन की रोकथाम के लिए सिफारिश के अनुसार नदीननाशक को सही समय, सही पानी की मात्रा के साथ घोलकर सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो प्रति हेक्टेयर पैदावार में वृद्धि की जा सकती है। यह जानकारी कृषि विकास अधिकारी डाॅ. अमरीक सिंह ने ब्लाक धारीवाल के गांव भोजराज में किसानों को कृषि तकनीकों के बारे में बताते समय कही। इस मौके पर डाॅ. अजायब सिंह रंधावा, बलदेव सिंह बुट्टर, मक्खन सिंह बांगोवाणी आदि मौजूद थे।उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल में गुल्ली-डंडा, बाथू, जंगली पालक, मैना, बटन बूटी, कंडियाली पालक, पित पापड़ा आदि नदीन फसल की पैदावार को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में गुल्ली-डंडा नदीन आइसोप्रोटोन 75 डब्ल्यू पी नदीन नाशक से नहीं मर रहा, वहां बिजाई से 30-35 दिन बाद 400 ग्राम पिनोक्साइड का प्रयोग करना चाहिए। डा. अजायब सिंह रंधावा ने कहा कि नदीननाशकों का छिड़काव हमेशा फ्लैट फैन या फ्लड जैट नोजल के प्रयोग से करना चाहिए। छिड़काव करते समय नोजल की ऊंचाई फसल से करीब 1.5 फुट होनी चाहिए और छिड़काव सीधे पट्टियों पर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छिड़काव करते समय नोजल को इधर-उधर नहीं घुमाना चाहिए। अगर खेतों में सल्फोसलपारून नामद नदीन नाशक का प्रयोग किया हो तो सावनी के मौसम में खेतों में चरी या मक्की की काश्त नहीं करनी चाहिए।
किसानों को नदीननाशकों के बारे में जानकारी देते डाॅ. अमरीक सिंह और अन्य।