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स्तनपान से बच्चे के दांत हो जाते हैं साफ
आमदेखने में आया है कि लोग अपने दांतों को लेकर अवेयर नहीं हैं, वे इनकी देखभाल सही ढंग से नहीं करते। इसके विपरीत शारीरिक सेहत दांतों पर ही निर्भर करती है। यह जानकारी सीएचसी काहनूवान की डेंटल मेडिकल अफसर डा. पल्लवी गुप्ता ने दी। उन्होंने कहा कि मानव शरीर एक अत्यंत जटिल रचना है। गर्भ के सातवें सप्ताह के अंत तक दांतों का इनेमल बनना शुरू हो जाता है। नौवें सप्ताह के बाद एक रेखा सी बन जाती है और गर्भ के दौरान ही बच्चे के दांतों की प्रारंभिक रचना बन जाती है। इसलिए गर्भवती को दूध, मक्खन, ताजे फल, हरी सब्जियों और पानी का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए।
जीभ,होठ और जबड़ों की होती है कसरत
उन्होंनेबताया कि बच्चे के जन्म के बाद उसके लिए सबसे बढिय़ा भोजन मां का दूध होता है। इससे शरीर का विकास होता है। स्तनपान से बच्चे की जीभ, होंठ और जबड़ों का व्यायाम होता है। दांतों की स्थापना के लिए स्थान का आभाव नहीं रहता। स्तनपान से बच्चे के मुंह में लार पैदा होती है, जिससे दांत मसूड़े खुद खुद साफ हो जाते हैं। बच्चे के दांत निकलने शुरू हों तो मां को रुई या मलमल का टुकड़ा अंगुली पर लपेटकर पांच फीसदी नमक के लोशन में भिगोकर बच्चे के मसूड़ों दांतों पर रोजाना लगाना चाहिए। दो से चार दांत निकलने पर बच्चे के भोजन में बदलाव लाना चाहिए क्योंकि दांतों के निकलने का मतलब है कि अब बच्चे को चबाने वाले भोजन की जरूरत है। बच्चे को सेब, नाशपाती, अमरूद बीज निकालकर या रोटी खाने के लिए देनी चाहिए। इससे उसके जबड़ों का व्यायाम होता है। बच्चे के दांत निकालने के समय परिजनों को उसके भोजन की जरूरत, सफाइ आदि का खास ध्यान रखना चाहिए। बच्चे के दांतों में कुछ असामान्य दिखाई देने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।