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बच्चों को पेंटावैलेंट के इंजेक्शन लगने हुए शुरू

6 वर्ष पहले
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बच्चोंको पांच बीमारियों गलघोटू, काली खांसी, धुनख्वा, काला पीलिया और निमोनिया से बचाने वाले पेंटावैलेंट इंजेक्शन अब जिला के सरकारी अस्पतालों में फ्री लगाया जाएगा। बुधवार को सिविल अस्पताल में इंजेक्शन लगाने की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ. रजनीश सूद की माैजूदगी में की गई।

उन्होंने कहा कि पेंटावैलेंट इंजेक्शन बच्चों के लिए संजीवनी है, जिससे उनकी मौत दर में कमी आएगी। पेंटावैलेंट इंजेक्शन बच्चों को लगने वाले अन्य इंजेक्शनों की संख्या कम करेगा और पांच रोगों से उनकी रक्षा करेगा। डाॅ. सूद ने बताया कि इससे निमोनिया के एक तिहाई और मेनिनजाइटिस के 90 फीसदी मामलों की रोकथाम होगी। ये इंजेक्शन बहुत ही सुरक्षित है क्योंकि इसका प्रयोग पहले ही 196 देशों में किया जा रहा है। देश में इस वेक्सिन की शुरुआत 2011 में केरला तमिलनाडु में सबसे पहले की गई थी। साल 2013 में गोवा, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और पुडुचेरी में इसकी शुरुआत की गई थी।

जिला टीकाकारण अधिकारी डाॅ. भावना शर्मा ने बताया कि यह इंजेक्शन पहले गरीब लोगों की पहुंच से बाहर था। प्राइवेट अस्पतालों में यह 1500 से 2000 रुपए में लगाया जाता था, लेकिन सरकारी अस्पताल में फ्री उपलब्ध होने से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि ये इंजेक्शन बच्चों को 6, 10 और 14 हफ्ते की उम्र में लगाया जाएगा। आज से ये जिले के अन्य ब्लाकों में भी उपलब्ध हो जाएगा। इसे पेंटावैलेंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें 5 बीमारियों से बचाव का मिश्रण है। इस मौके पर जिला परिवार भलाई अधिकारी डाॅ. चरणजीत सिंह काहलों, एसएमओ सुधीर कुमार आदि मौजूद थे।

सिविल सर्जन डाॅ. रजनीश सूद के नेतृत्व में बच्चे को पेंटावैलेंट का इंजेक्शन लगाता स्टाफ।