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4 युवकों ने की नशे से तौबा, अब दूसरों को अवेयर करेंगे

6 वर्ष पहले
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राहसे भटक कर नशे की दलदल में फंसकर युवा अपना जीवन तबाह करते जा रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने परिवारों का जीवन भी नर्क बना रहे हैं। शहर में चल रहे रेडक्रॉस नशा छुड़ाओ केंद्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रोमेश महाजन ने बताया कि सेंटर में नशा छोड़ने के इच्छुक युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। सेंटर में पहुंचने वाले नशे के खतरनाक प्रभावों की कहानी बयां करते हैं, जिन्हें सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

सेंटर में दाखिल एक ही गांव के चार युवक पिछले तीन साल से हेरोइन के नशे की गिरफ्त में थे। इनमें से रतनपाल और वेद दोनों सगे भाई हैं। जसपाल और मंगल इनके ही जोड़ीदार हैं। चारों जिला जालंधर के शहर नकोदर के गांव खहरा मुस्तरका के रहने वाले हैं। वेद प्रकाश कराटे का बढ़िया खिलाड़ी है और नेशनल स्तर पर ब्लेक बेल्ट प्राप्त कर चुका है। हालांकि चारों ज्यादा से ज्यादा मेट्रिक तक पढ़े हैं और अब रेत निकालने और बेचने का काम करने वाली ट्रालियों पर ड्राइवरी करते हैं। करीब तीन साल पहवे उन्होंने सिगरेट का नशा शुरू किया। फिर गांव के ही किसी युवक के साथ पास के गांव में हेरोइन बेचने वाले युवक के संपर्क में आए। वह वहां से हेरोइन की खुराक 500 रुपए के हिसाब से लेते थे और धीरे-धीरे नशे के आदी हो गए। वे दिन में दो या तीन बार इसकी खुराक लेेते थे। इस तरह रोजाना एक से डेढ़ हजार रुपए खर्च कर देते थे।

छोटी उम्र के बावजूद चारों की शादी हो चुकी है और इनमें से मंगल सिंह को छोड़कर बाकी तीनों के बच्चे भी हैं। नशे की लत के कारण वे अपनी कमाई का करीब 70 फीसदी हिस्सा हेरोइन पर खर्च कर देते थे। जब कभी नशा करने के लिए पैसे नहीं होते थे तो तलब के कारण उसका बुरा हाल हो जाता था। ऐसे में वे नशीले कैप्सूल खाकर गुजारा कर लेते थे। इसके चलते उनके परिवार भी तबाह हो रहे थे। आखिर उन्होंने नशा छोड़ने का फैसला किया और गुरदासपुर के सेंटर में पहुंच गए। युवाओं ने बताया कि इलाज के बाद वे काफी राहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में कई और युवा नशे के आदी हैं। अब वे उन्हें भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। वेद प्रकाश ने कहा कि वह फिर से कराटों पर ध्याना देगाा और बच्चों को ट्रेनिंग भी।

सेंटर में नशा छोड़ने वाले चारों युवक प्रोजेक्ट डायरेक्टर रोमेश महाजन के साथ।